धनगाँव में 45 वर्षों से अनवरत जीवंत है श्रीकृष्ण रासलीला की परंपरा, नवीन आयोजन समिति का गठन

- दस दिवसीय विराट मेले में उमड़ते हैं श्रद्धालु, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के रासलीला दलों के बीच होती है प्रतिस्पर्धा
बलरामपुर (रामानुजगंज), छत्तीसगढ़। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और श्रीकृष्ण भक्ति की समृद्ध परंपरा को सहेजने में ग्रामीण समाज की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। इसी सांस्कृतिक विरासत का एक अनुपम उदाहरण छत्तीसगढ़ के बलरामपुर (रामानुजगंज) जिले के ग्राम धनगाँव में देखने को मिलता है, जहाँ पिछले 45 वर्षों से श्रीकृष्ण रासलीला महोत्सव का आयोजन निरंतर होता आ रहा है। साढ़े चार दशकों से अनवरत जारी यह परंपरा न केवल ग्रामीणों की धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि विभिन्न राज्यों की लोककला, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है। इस वर्ष भी महोत्सव को भव्य स्वरूप देने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में 18 अक्टूबर 2026, रविवार को ग्राम धनगाँव में ग्रामीणों की आम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से नवीन आयोजन समिति का गठन किया गया।
बैठक में ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस वर्ष भी श्रीकृष्ण रासलीला महोत्सव को पूरे श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ आयोजित करने का संकल्प लिया। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श के बाद आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए नई समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का चयन किया गया। वरिष्ठजनों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को महोत्सव की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने तथा आयोजन को सफल बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।
45 वर्षों की परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक एकता का संगम
ग्राम धनगाँव का श्रीकृष्ण रासलीला महोत्सव वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित इस आयोजन के प्रति ग्रामीणों में गहरी आस्था है। प्रत्येक वर्ष होने वाले इस महोत्सव में आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। रासलीला के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों, उनकी दिव्य लीलाओं और भक्ति परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल स्थानीय कलाकार ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले रासलीला दल भी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के अनेक प्रसिद्ध रासलीला दल इस महोत्सव में शामिल होते हैं। विभिन्न दलों के बीच होने वाली प्रतिस्पर्धा आयोजन को और भी आकर्षक बनाती है। कलाकार अपनी प्रस्तुति, अभिनय, संगीत, नृत्य और मंचीय कला के माध्यम से दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जोड़ते हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दल को पुरस्कृत भी किया जाता है।
इस प्रकार धनगाँव का यह महोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोककलाओं के संरक्षण, कलाकारों को प्रोत्साहन देने और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं के परस्पर आदान-प्रदान का अवसर भी प्रदान करता है।
श्रीकृष्ण की झांकियाँ और विधि-विधान से पूजा-अर्चना
रासलीला महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित आकर्षक झांकियों एवं मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। इनकी विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक वातावरण, भक्ति संगीत और कलाकारों की प्रस्तुतियाँ पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना देती हैं। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते हैं।
महोत्सव के साथ दस दिनों तक विराट मेले का भी आयोजन किया जाता है। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों की उपस्थिति रहती है। यह मेला धार्मिक उत्साह के साथ-साथ ग्रामीण जनजीवन में सामाजिक मेल-मिलाप और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देता है। विभिन्न प्रकार की दुकानों, स्थानीय गतिविधियों और जनसमागम के कारण आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
सर्वसम्मति से गठित हुई नवीन आयोजन समिति
18 अक्टूबर को आयोजित आम बैठक में महोत्सव की तैयारियों, विभिन्न व्यवस्थाओं और आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के विषय पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस वर्ष भी महोत्सव को भव्य रूप देने का निर्णय लिया। इसके बाद सर्वसम्मति से नई समिति का गठन किया गया।
नवगठित समिति में श्री दिवाकर मुखर्जी को अध्यक्ष तथा श्री शंकर मुखर्जी को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उपाध्यक्ष के रूप में श्री मंगल विश्वास, श्री तारक बनार्जी एवं श्री मनोज विश्वास को चुना गया। सहसचिव के दायित्व के लिए श्री शंकर सरकार और श्री नरोत्तम बछाड़ का चयन किया गया। वहीं, श्री तापस राय कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं।
महोत्सव की विभिन्न व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने के लिए बाजार समिति, कार्यक्रम प्रभारी और निर्णायक मंडल के सदस्यों का भी चयन किया गया है।
नवगठित समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य
- अध्यक्ष: श्री दिवाकर मुखर्जी
- उपाध्यक्ष: श्री मंगल विश्वास, श्री तारक बनार्जी एवं श्री मनोज विश्वास
- सचिव: श्री शंकर मुखर्जी
- सहसचिव: श्री शंकर सरकार एवं श्री नरोत्तम बछाड़
- कोषाध्यक्ष: श्री तापस राय
- बाजार समिति सदस्य: श्री सत्यजीत मिस्त्री, श्री खोखन भास्कर, श्री विशाल सरकार, श्री तुफान बछाड़ एवं श्री प्रवीण घरामी
- कार्यक्रम प्रभारी: श्री रंजन मिस्त्री, श्री दीपंकर मुखर्जी एवं श्री नरेश पोद्दार
- निर्णायक मंडल सदस्य: श्री खोखन बछाड़, श्री विनय विश्वास, श्री अजीत मिस्त्री एवं श्री रामकृष्ण माल
सामूहिक सहभागिता से परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
समिति गठन के बाद ग्राम धनगाँव में श्रीकृष्ण रासलीला महोत्सव को लेकर उत्साह का वातावरण है। ग्रामीणों को विश्वास है कि नई समिति के नेतृत्व में आयोजन की तैयारियों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा और 45 वर्षों से चली आ रही इस गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा मिलेगी।
किसी भी सांस्कृतिक परंपरा की दीर्घायु केवल आयोजन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे समाज की सामूहिक आस्था, सहयोग, समर्पण और भावी पीढ़ियों तक विरासत पहुँचाने का संकल्प होता है। धनगाँव में साढ़े चार दशकों से जारी श्रीकृष्ण रासलीला महोत्सव इसी सामूहिक चेतना का परिचायक है। यह आयोजन बताता है कि ग्रामीण समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहकर धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रख सकता है।श्रीकृष्ण रासलीला महोत्सव के माध्यम से धनगाँव न केवल अपनी धार्मिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए हुए है, बल्कि विभिन्न राज्यों के कलाकारों और श्रद्धालुओं को एक साझा मंच पर जोड़कर सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दे रहा है। अब ग्रामीणों की निगाहें आगामी महोत्सव पर टिकी हैं। उम्मीद है कि नवीन आयोजन समिति के सामूहिक प्रयासों से इस वर्ष का आयोजन भी श्रद्धा, भक्ति, कला और सामाजिक सौहार्द का यादगार उत्सव बनेगा।
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