ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को लेकर PIB पटना की प्रेस वार्ता

कचरे को समस्या नहीं, संसाधन के रूप में देखने पर जोर; बिहार के 264 शहरी निकायों में लागू होगा मॉडल SWM उपविधि का ढांचा
पटना। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और संसाधन-आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को लेकर प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), पटना द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एवं स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अधिकारियों ने नए नियमों के प्रावधानों, उनके उद्देश्यों तथा बिहार में इनके प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रेस वार्ता में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के राज्य समन्वयक राजेश कुमार, शहरी विकास एवं आवास विभाग (UDHD), स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के उप सचिव रंजन कुमार चौधरी तथा पत्र सूचना कार्यालय, पटना के उप निदेशक लौकिक पारख उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का उद्देश्य केवल कचरे के संग्रहण और निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि अपशिष्ट को एक उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने की दिशा में व्यवस्था को आगे बढ़ाना है। इसके तहत कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण तथा उससे उपयोगी सामग्री और मूल्य प्राप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। यह पूरी व्यवस्था चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा के अनुरूप है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के राज्य समन्वयक राजेश कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के प्रथम चरण में वर्ष 2019 तक मुख्य रूप से शौचालय निर्माण और खुले में शौच से मुक्ति यानी ODF (Open Defecation Free) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया था। प्रथम चरण में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में व्यापक कार्य हुआ।
उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में स्वच्छता की अवधारणा को और व्यापक बनाते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरों तथा सामुदायिक स्तर से निकलने वाले कचरे के समुचित प्रबंधन, उसके संग्रहण, प्रसंस्करण और उपयोग की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य गांवों को केवल खुले में शौच से मुक्त बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें समग्र रूप से स्वच्छ और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था से जोड़ना है।
राजेश कुमार ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (SWSG) का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में बिहार की स्थिति 22वें स्थान पर थी। इसके बाद राज्य में स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप अगले स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण में बिहार ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए शीर्ष राज्यों में स्थान प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में राज्य के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विशेष रूप से भागलपुर और सुपौल जैसे जिलों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को स्थायी स्वरूप देने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है। घर से ही कचरे के उचित प्रबंधन और सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी विकसित होने से अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
वहीं स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के उप सचिव रंजन कुमार चौधरी ने शहरी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित नए नियमों का मूल उद्देश्य कचरे को केवल बेकार वस्तु मानकर फेंकने के बजाय उसे एक उपयोगी संसाधन के रूप में देखने की सोच विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं। इन नियमों ने वर्ष 2016 में लागू पुराने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का स्थान लिया है तथा 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हैं।
नए नियमों के पीछे मूल विचार यह है कि कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। किसी वस्तु के उपयोग के बाद उसे सीधे कचरा मानकर निस्तारित कर देने के बजाय उसमें मौजूद उपयोगी सामग्री को अलग कर उसका पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण अथवा अन्य उपयोगी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल किया जाए। इस व्यवस्था से एक ओर लैंडफिल पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर अपशिष्ट से आर्थिक मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का उद्देश्य संसाधनों का अधिकतम और दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित करना है। इसमें उत्पादों और सामग्रियों को उपयोग के बाद पुनः अर्थव्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया जाता है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में यह दृष्टिकोण कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देता है।
बिहार में इन नियमों को प्रभावी एवं एकरूप तरीके से लागू करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा एक मॉडल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन उपविधि (Model SWM Bye-laws) तैयार की गई है। इस मॉडल उपविधि में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों को समाहित किया गया है, ताकि राज्य के शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर एक स्पष्ट और व्यवस्थित कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया जा सके।
बताया गया कि यह मॉडल उपविधि बिहार के सभी 264 शहरी स्थानीय निकायों के लिए तैयार की गई है। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत शामिल हैं। इसके माध्यम से राज्य के विभिन्न शहरी निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है।
मॉडल उपविधि के लागू होने से शहरी स्थानीय निकायों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया को लेकर अधिक स्पष्टता आएगी। कचरे के संग्रहण से लेकर उसके परिवहन, पृथक्करण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और अंतिम निस्तारण तक की व्यवस्था को निर्धारित कानूनी एवं प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप संचालित करने में सहायता मिलेगी।
प्रेस वार्ता में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आधुनिक शहरों के सामने बढ़ता ठोस कचरा एक महत्वपूर्ण चुनौती है। तेजी से हो रहे शहरीकरण, बदलती जीवनशैली और उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण प्रतिदिन बड़ी मात्रा में अपशिष्ट उत्पन्न होता है। ऐसे में केवल कचरे को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर उसका निस्तारण कर देना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। आवश्यकता इस बात की है कि कचरे के उत्पादन से लेकर उसके अंतिम उपयोग तक पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाया जाए।
इसी सोच के तहत नए नियमों में कचरे को संसाधन के रूप में देखने पर जोर दिया गया है। यदि घरों, संस्थानों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का उचित पृथक्करण किया जाए तो उसमें मौजूद बड़ी मात्रा में पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग किया जा सकता है। जैविक कचरे से कंपोस्ट या अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जबकि कागज, प्लास्टिक, धातु और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।
इस पूरी व्यवस्था की सफलता में नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। स्वच्छता केवल नगर निकायों या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की दैनिक आदतों से इसका सीधा संबंध है। घर से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग रखना, सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकना, पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं को अलग करना तथा स्थानीय निकाय की निर्धारित व्यवस्था का पालन करना स्वच्छ और स्वस्थ शहर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत किए जाने से स्वच्छता अभियान को व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है। गांवों में कचरा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई है।
प्रेस वार्ता में सामने आई जानकारी से स्पष्ट है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 केवल कचरा निस्तारण से संबंधित नियमों का नया स्वरूप नहीं है, बल्कि अपशिष्ट के प्रति सोच में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कचरे को बोझ मानने के बजाय उसमें मौजूद संसाधन और आर्थिक मूल्य को पहचानना इस व्यवस्था की केंद्रीय अवधारणा है।
बिहार में सभी 264 शहरी स्थानीय निकायों के लिए तैयार मॉडल SWM उपविधि इस दिशा में राज्य स्तर पर एक समान और स्पष्ट ढांचा उपलब्ध कराने का प्रयास है। आने वाले समय में इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय निकायों की क्षमता, नागरिक भागीदारी और कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण की व्यवस्था इस अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्वच्छता की यह यात्रा केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक अर्थ है—कम कचरा पैदा करना, कचरे को स्रोत पर अलग करना, उपयोगी सामग्री को पुनः अर्थव्यवस्था में लाना और शेष अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना। यही दृष्टिकोण स्वच्छता को स्थायी स्वरूप देने और पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
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