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दुश्मनों की वफ़ा पर भरोसा है मुझको,

दुश्मनों की वफ़ा पर भरोसा है मुझको,

डॉ अ कीर्तिवर्धन
दुश्मनों की वफ़ा पर भरोसा है मुझको,
दुश्मनी निभाना बखूबी जानते हैं वो।
दोस्तों का क्या भरोसा कब बदल जायें,
मुश्किल में राह बदलना जानते हैं वो।


नहीं मार सका मुझे, दुश्मन आज तक,
दोस्तों के इंतज़ार में, जागता हूँ रात भर।
भरोसा था वो आएँगे, मुश्किल में साथ मेरे,
कोई आया नहीं अभी तक, निगाहें हैं राह पर।


दुश्मनों ने वफ़ा अपनी खूब निभायी,
उन्होंने ताउम्र मुझसे दुश्मनी निभायी।
दोस्त जाने कितने आये और चले गए,
दोस्ती किसी ने ना दुश्मनों सी निभायी।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
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