जमुई-समस्तीपुर की घटनाओं पर माया श्रीवास्तव ने सरकार से मांगा इस्तीफा

- बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार विफल, अपराधियों के खिलाफ जाति-धर्म देखकर नहीं बल्कि कानून के अनुसार हो कार्रवाई
पटना। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार और उसका वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश में महिला एवं बालिका सुरक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच ‘समर्थ नारी, समर्थ भारत’ की राष्ट्रीय सह-संयोजिका तथा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की बिहार प्रदेश महामंत्री माया श्रीवास्तव ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है।
माया श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार की बेटियों, महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि सार्वजनिक स्थानों पर छात्राओं और युवतियों के साथ इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं तो सरकार को केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिसिंग और सुरक्षा व्यवस्था की भी गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने जमुई की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। उपलब्ध पुलिस एवं मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 19 सितंबर को जमुई में एक नाबालिग छात्रा और उसके पुरुष सहपाठी को एक समूह ने कथित रूप से रोका और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है।
माया श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन महिलाओं और बच्चियों में सुरक्षा की वास्तविक भावना तभी पैदा होगी जब उन्हें यह विश्वास हो कि वे अपने घर, विद्यालय, कोचिंग संस्थान, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर बिना भय के आ-जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस की सक्रिय उपस्थिति, संवेदनशील गश्त, त्वरित शिकायत व्यवस्था और दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि “जहां बेटियां स्वयं को सुरक्षित महसूस न करें, वहां सरकार से जवाबदेही मांगना जनता का अधिकार है।” उनके अनुसार, सरकार को महिला सुरक्षा के प्रश्न को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठाकर गंभीर प्रशासनिक विषय के रूप में लेना चाहिए।
समस्तीपुर की घटना ने बढ़ाई चिंता
माया श्रीवास्तव ने जमुई की घटना के बाद समस्तीपुर में सामने आई कथित छेड़छाड़ की घटना का भी उल्लेख किया। 24 सितंबर को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समस्तीपुर में एक युवती के साथ कथित रूप से सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार घटना की जांच जारी है।
उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं महिला सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। उनका कहना था कि किसी भी सरकार के लिए यह पर्याप्त नहीं है कि घटना होने के बाद आरोपी पकड़े जाएं; प्रशासन को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें अपराधियों के भीतर कानून का भय और महिलाओं के भीतर सुरक्षा का विश्वास दोनों कायम हों।
माया श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार की महिलाओं और बच्चियों को राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि सुरक्षित वातावरण चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अपराधी के खिलाफ कार्रवाई करते समय उसकी जाति, धर्म, राजनीतिक संपर्क या सामाजिक पहचान नहीं देखी जानी चाहिए।
“अपराधी की कोई जाति नहीं होती”
माया श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की अस्मिता से जुड़े अपराध को जातीय या राजनीतिक चश्मे से देखना समाज के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि अपराधी किसी भी जाति, समुदाय या धर्म का हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अपराध के मामलों में आरोपियों की सामाजिक पहचान या राजनीतिक संबद्धता को चर्चा का आधार बनाने के बजाय पीड़ित को न्याय और आरोपी को कानून के अनुरूप दंड दिलाने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसी अपराध को राजनीतिक लाभ या जातीय ध्रुवीकरण का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
मैथिली ठाकुर के बयान पर भी उठाए सवाल
माया श्रीवास्तव ने भाजपा विधायक एवं गायिका मैथिली ठाकुर के जमुई प्रकरण पर दिए गए बयानों को लेकर भी सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मैथिली ठाकुर ने घटना की निंदा करते हुए कहा था कि केवल बेटियों को ही नहीं बल्कि बेटों को भी यह सिखाना आवश्यक है कि किसी लड़की को उसकी इच्छा के विरुद्ध छूना अपराध है। उन्होंने मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को धन्यवाद भी दिया था और सख्त सजा की मांग की थी।
माया श्रीवास्तव ने हालांकि उनके बयान की अपनी व्याख्या करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पीड़ितों की संवेदनाओं को केंद्र में रखकर बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर पूरे प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि यह कहता है कि वह स्वयं देर शाम या रात में सुरक्षित घूम सकती है, तो यह उसका व्यक्तिगत अनुभव हो सकता है, लेकिन इससे आम महिलाओं और छात्राओं के सामने मौजूद सुरक्षा संबंधी चिंताएं समाप्त नहीं हो जातीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मैथिली ठाकुर ने घटना के संदर्भ में कानून-व्यवस्था और बच्चों के व्यवहार तथा संस्कार की आवश्यकता पर बात की थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
“महिला सुरक्षा को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर रखना होगा”
माया श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह समाज और सरकार दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के बजाय पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, छात्राओं के आवागमन वाले मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने तथा महिला एवं बाल अपराधों की जांच को प्राथमिकता देने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण की बातें तभी सार्थक होंगी जब वे भयमुक्त वातावरण में शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों में भाग ले सकें।
उन्होंने कहा कि “समर्थ नारी, समर्थ भारत” का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में आवाज उठाना है। उनका कहना था कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
सरकार से जवाबदेही की मांग
माया श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से महिला सुरक्षा को लेकर विस्तृत जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जा रही है, पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था को किस प्रकार मजबूत किया जा रहा है तथा महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित जांच और अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल अपराध होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय अपराध रोकने की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी चाहिए।
माया श्रीवास्तव ने कहा कि जमुई और समस्तीपुर जैसी घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया है। ऐसे मामलों में पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो के प्रसार को रोकना और आरोपियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। जमुई मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया से वीडियो हटाने की दिशा में भी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि “बेटियों की सुरक्षा केवल सरकार की उपलब्धि बताने का विषय नहीं, बल्कि जमीन पर महसूस होने वाली वास्तविकता होनी चाहिए।”
इस्तीफे की मांग दोहराई
माया श्रीवास्तव ने अंततः मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों में सुरक्षा का विश्वास कायम करने में असफल रहती है तो जनता को सरकार से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि उनका संगठन महिला सुरक्षा के मुद्दे पर आगे भी आवाज उठाता रहेगा और किसी भी पीड़ित महिला या बच्ची के साथ अन्याय के खिलाफ सामाजिक स्तर पर जागरूकता पैदा करने का प्रयास करेगा।
गौरतलब है कि बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर बहस एक बार फिर तेज हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस जांच, न्यायिक प्रक्रिया और राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए जाने वाले कदम इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
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