"सुविधा या संकल्प"
पंकज शर्मामनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह सत्य को पहचानता तो है, किंतु उसके अनुकूल चलने का साहस प्रायः नहीं जुटा पाता। सुविधा तत्कालिक होती है, जबकि सिद्धांत धैर्य, त्याग एवं आत्मानुशासन माँगते हैं। इसलिए मनुष्य अनेक बार अपनी अंतरात्मा की पुकार को दबाकर सरल मार्ग चुन लेता है। उस क्षण निर्णय सहज लगता है, किंतु समय बीतने पर वही सुविधा अंतर्मन में एक अनुत्तरित प्रश्न बनकर खड़ी हो जाती है।
वास्तविक स्वतंत्रता परिस्थितियों के अनुकूल चलने में नहीं, अपितु अपनी मान्यताओं के अनुरूप जीने में है। प्रत्येक निर्णय आत्मा पर अपनी एक छाप छोड़ता है; अतः सुविधा से नहीं, विवेक से चुना गया मार्ग ही जीवन को गरिमा प्रदान करता है। जो व्यक्ति अपने विश्वासों के प्रति निष्ठावान रहता है, वह कठिनाइयों से भले ही गुज़रे, किंतु पश्चात्ताप से बचा रहता है। अंततः जीवन की शांति सही होने से नहीं, स्वयं के प्रति सच्चे होने से जन्म लेती है।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा एवं संस्कार)
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