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सुंदरता

सुंदरता

जय प्रकाश कुवंर
शारीरिक सुंदरता चाहे जितनी हो,
यह कभी नहीं चिरस्थायी है।
मानव शरीर की असल सुंदरता,
उसका स्वभाव, व्यवहार और सच्चाई है।।
चेहरा काला हो या गोरा हो,
रूप भी भले चाहे सामान्य हो,
असल सुंदरता वो है,
जिससे किसी का नहीं अपमान हो।
सुंदरता तो देखने वालों की आंखों में बसती है,
लेकिन स्वभाव दिल में रहती है।
शारीरिक सुंदरता नष्ट हो जाने पर भी,
स्वभाव और व्यवहार की सुंदरता चमकती रहती है।।
आज जो सुंदर जवान चेहरा दिखाते फिर रहे हो,
वह एक दिन मुरझा जाएगा।
चाहने वाले तब मुंह फेर लेंगे,
तन की सुंदरता का हकीकत तब समझ में आएगा।।
जवानी में अगर इतराना है किसी को तो,
अपना स्वभाव और व्यवहार बनाओ।
हाड़ मांस और चमड़ी की सुंदरता पर लोगों,
जरूरत से ज्यादा समाज में मत इतराओ।।


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