उज्जैन में हर्षोल्लास से मनाई गई क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती

- भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चन्द्र पोद्दार ने कहा-ढींगरा के बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन में नई चेतना का संचार किया
उज्जैन, 18 सितंबर 2026। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती उज्जैन स्थित गीता भवन परिसर में भारतीय जन महासभा से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों द्वारा श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रभावना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा के जीवन, उनके साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदान को स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चन्द्र पोद्दार ने मदनलाल ढींगरा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में ढींगरा का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना संघर्ष किया और मदनलाल ढींगरा भी उसी क्रांतिकारी परंपरा के एक प्रमुख व्यक्तित्व थे।
धर्म चन्द्र पोद्दार ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीयों के साथ होने वाले अत्याचार और औपनिवेशिक दमन के विरोध में देश के भीतर और विदेशों में भी भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियां सक्रिय थीं। उन्होंने कहा कि मदनलाल ढींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या की घटना के माध्यम से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अपने तीव्र विरोध को अभिव्यक्त किया। पोद्दार के अनुसार, इस घटना ने उस समय ब्रिटेन में रह रहे भारतीयों और ब्रिटिश प्रशासन के बीच चल रहे स्वतंत्रता संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
उन्होंने कहा कि मदनलाल ढींगरा की कार्रवाई ने ब्रिटिश शासन को यह एहसास कराया कि भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय युवाओं में भी औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध गहरा असंतोष और स्वतंत्रता की भावना मौजूद थी। उन्होंने कहा कि लंदन में घटित यह घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गई।
धर्म चन्द्र पोद्दार ने कहा कि मदनलाल ढींगरा का जीवन युवाओं के लिए साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को केवल राजनीतिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि उन असंख्य लोगों के त्याग और संघर्ष के रूप में भी समझने की आवश्यकता है, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को त्यागकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मदनलाल ढींगरा के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर का प्रतिनिधित्व करता है, जब देश के अनेक युवा ब्रिटिश शासन से मुक्ति को अपना सर्वोच्च लक्ष्य मानकर क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ रहे थे। उनके साहस और निर्भीकता ने समकालीन भारतीय युवाओं के बीच राष्ट्रवादी चेतना को प्रभावित किया।
जयंती समारोह में नरेंद्र नाथ राय, अंतर्यामी पांडा, रंजन महाकुर, जया साहू, अनन्या साहू एवं शंभू साहू सहित भारतीय जन महासभा से जुड़े अनेक लोगों ने सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने मदनलाल ढींगरा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के योगदान को स्मरण किया।
देश के विभिन्न हिस्सों में भी हुआ स्मरण
मदनलाल ढींगरा की जयंती के अवसर पर देश के विभिन्न स्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारतीय जन महासभा से जुड़े लोगों ने अलग-अलग शहरों में क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा के जीवन और उनके योगदान को याद किया।
रतलाम में अनीता यादव, मधु परिहार और अनीता झालीवाल ने जयंती कार्यक्रम में सहभागिता की। वहीं पाकुड़ में कृष्णा कुमार साहा, जमशेदपुर में आरती श्रीवास्तव एवं निशा वाणी तथा डाल्टेनगंज में पीयूष तुलस्यान सहित अन्य लोगों ने मदनलाल ढींगरा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के जीवन और उनके संघर्ष की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उनका मानना था कि इतिहास के ऐसे अध्याय युवाओं को देश के प्रति अपने दायित्वों को समझने और राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।
भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चन्द्र पोद्दार ने कहा कि देश की स्वतंत्रता अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। इसलिए स्वतंत्रता आंदोलन के प्रत्येक महत्वपूर्ण पात्र और घटना का अध्ययन तथा स्मरण समाज की ऐतिहासिक चेतना के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मदनलाल ढींगरा की जयंती केवल एक क्रांतिकारी को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के उस दौर को स्मरण करने का अवसर भी है, जिसमें युवाओं ने अपने जीवन की परवाह किए बिना देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया।
समारोह का वातावरण राष्ट्रभावना और श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा। उपस्थित लोगों ने मदनलाल ढींगरा के साहस और बलिदान को नमन करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया।
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