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आचार्यकुल के 60 वर्ष पूर्ण होने पर हरिद्वार में होगा विशेष विमर्श

आचार्यकुल के 60 वर्ष पूर्ण होने पर हरिद्वार में होगा विशेष विमर्श

  • ऋषि विनोबा भावे स्मृति सम्मान से विभूतियों को किया जाएगा सम्मानित, 11 अक्टूबर तक जीवनवृत्त भेजने का आग्रह
हरिद्वार/पटना, 29 सितंबर। आचार्यकुल को जयजगत की दिशा में आगे बढ़ाने तथा उसके छह दशकों की यात्रा को स्मरणीय बनाने के उद्देश्य से देवभूमि हरिद्वार, उत्तराखंड में आगामी 24 एवं 25 अक्टूबर 2026 को विशेष आयोजन किया जाएगा। आचार्यकुल स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2027-28 में आयोजित होने वाले 60 वर्ष पूर्ति महोत्सव की रूपरेखा और कार्यक्रमों को लेकर इस आयोजन में व्यापक विमर्श किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य आचार्यकुल की अब तक की यात्रा, उसके विचार, सामाजिक सरोकार तथा भविष्य की दिशा पर गंभीर मंथन करना है।

आचार्यकुल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि आचार्यकुल की स्थापना के छह दशक पूरे होने जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण पड़ाव को केवल एक वर्षगांठ के रूप में न मनाकर इसे विचार, सेवा, शिक्षा, समाज निर्माण और मानव कल्याण से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में हरिद्वार में होने वाला आगामी आयोजन विशेष महत्व रखता है। यहां आचार्यकुल की स्थापना से लेकर अब तक की वैचारिक एवं सामाजिक यात्रा पर चर्चा के साथ-साथ आने वाले समय में इसकी भूमिका को और व्यापक बनाने पर भी विचार किया जाएगा।

कार्यक्रम में संत विनोबा भावे के विचारों, उनके सामाजिक दर्शन तथा जयजगत की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे महानुभावों को ‘ऋषि विनोबा भावे स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किए जाने की भी योजना है। इसके माध्यम से उन व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने विनोबा भावे के विचारों, उनके मानवतावादी चिंतन, सामाजिक समरसता, ग्राम स्वराज, सेवा और लोककल्याण की भावना को अपने कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

आचार्यकुल के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इनमें शिक्षक, साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी, शिक्षाविद्, कवि तथा सामाजिक एवं रचनात्मक क्षेत्र में सक्रिय अन्य महानुभाव शामिल हैं। आयोजकों का मानना है कि किसी भी विचारधारा या सामाजिक अभियान की निरंतरता केवल संस्थागत प्रयासों से संभव नहीं होती, बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के सहयोग और सहभागिता से ही उसका व्यापक प्रभाव स्थापित होता है। इसलिए आचार्यकुल से जुड़े रहे तथा उसके कार्यक्रमों और उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाले लोगों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा।

इस संदर्भ में आचार्यकुल की ओर से ऐसे सभी महानुभावों से आग्रह किया गया है कि वे अपना जीवनवृत्त 11 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित पटल पर प्रेषित करें, ताकि उनके कार्यों और योगदान के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सके तथा सम्मान कार्यक्रम की तैयारी व्यवस्थित रूप से की जा सके। जीवनवृत्त के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के सामाजिक, शैक्षणिक, साहित्यिक, पत्रकारिता, सेवा अथवा आचार्यकुल से जुड़े कार्यों का परिचय प्राप्त किया जाएगा।

हरिद्वार में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में बाहर से आने वाले प्रतिभागियों के लिए 23 अक्टूबर की संध्या से 26 अक्टूबर के अपराह्न तक संस्थागत व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी दी गई है। आयोजकों ने प्रतिभागियों से विशेष रूप से आग्रह किया है कि वे अपने आगमन और वापसी की पूर्व सूचना अवश्य दें, ताकि आवास, भोजन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की जा सकें।

प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि बिना पूर्व सूचना के कार्यक्रम में पहुंचने वाले अतिथियों को स्वयं भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है और आयोजकों को भी व्यवस्था करने में कठिनाई होगी। इसलिए सभी महानुभावों से अनुरोध किया गया है कि वे हरिद्वार आने की अपनी योजना तथा वापसी की सूचना समय रहते उपलब्ध कराएं। इससे आयोजन की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से संचालित करने में सहायता मिलेगी।

आचार्यकुल के इस आयोजन को केवल एक संस्थागत कार्यक्रम के बजाय विचार और सेवा की उस परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शिक्षा, समाज, साहित्य, पत्रकारिता और लोकसेवा को व्यापक मानवीय उद्देश्य से जोड़ा जाता है। आचार्यकुल की छह दशक की यात्रा के आगामी पड़ाव पर आयोजित होने वाला यह विमर्श इस बात पर भी केंद्रित रहेगा कि वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों के बीच आचार्यकुल की भूमिका को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और जयजगत की भावना को समाज के व्यापक वर्ग तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।

आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2027-28 में आचार्यकुल स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रस्तावित 60 वर्ष पूर्ति महोत्सव को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी अभी से शुरू की जा रही है। हरिद्वार का यह आयोजन उसी तैयारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आचार्यकुल समर्थकों, विचारकों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों और रचनात्मक क्षेत्र के व्यक्तित्वों की सहभागिता अपेक्षित है।

आयोजकों ने सभी संबंधित महानुभावों से समय सीमा का ध्यान रखते हुए अपना जीवनवृत्त 11 अक्टूबर तक भेजने और हरिद्वार में प्रस्तावित आयोजन में अपनी सहभागिता की पूर्व सूचना देने का आग्रह किया है। कार्यक्रम के माध्यम से आचार्यकुल की छह दशकों की यात्रा को स्मरण करने के साथ-साथ भविष्य के लिए नई दिशा और कार्ययोजना तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

‘जयजगत’ के उद्घोष के साथ जारी संदेश में आचार्य धर्मेन्द्र ने सभी महानुभावों से आयोजन में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

— आचार्य धर्मेन्द्र

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