सावन का पहला सोमवार, गूँजे शिव-भक्ति अपार
कुमार महेंद्रपुनीत-पावन श्रावण आया,
गूँजे शिव-महिमा बारंबार।
हरित धरा नव रूप सँवारे,
कण-कण करता शिव-जयकार।
धर्म, भक्ति, श्रद्धा की सरिता,
बहती जैसे अमृत-धार।
सावन का पहला सोमवार, गूँजे शिव-भक्ति अपार।।
उमड़े भक्त शिवालय की ओर,
हर्षित जन-जन, भक्त-प्रत्येक।
जल, दुग्ध, दधि, मधु, घृत अर्पित,
पंचामृत से पावन अभिषेक।
बेलपत्र, धतूरा, श्वेत सुमन,
स्वीकारें शिव, हे पालनहार।
सावन का पहला सोमवार, गूँजे शिव-भक्ति अपार।।
विधिवत पूजन, मंत्रोच्चारण,
गूँजे मंदिर का हर द्वार।
शिव चालीसा, रुद्र-पाठ से,
निर्मल होता अंतर्मन-सार।
सकारात्मक चेतना जागे,
आत्मशुद्धि का मिले आधार।
सावन का पहला सोमवार, गूँजे शिव-भक्ति अपार।।
मनभावन सावन का सोमवार,
रग-रग शिव-भक्ति का संचार।
पग-पग सजे दिव्य अनुष्ठान,
गूँजे "हर-हर महादेव" पुकार।
पूर्ण हों सब शुभ संकल्प,
बरसे शिव-कृपा अपरम्पार।
सुख, समृद्धि, मंगल, कल्याण,
हर आँगन खुशियाँ सदाबहार।
सावन का पहला सोमवार, गूँजे शिव-भक्ति अपार।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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