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आखिरी सत्य

आखिरी सत्य

हारा थका रात सो गया
सपनों में खो गया।
आकर यमराज ने बताया
कल तेरा आखिरी दिन है।।

अब सुबह तक का समय है
उसमें जो करना है कर लो।
अपनी मृत्यु का सत्य जान लो
अपनों को तुम पहचान लो।।

सुबह होते ही मौत हो गई
दुनिया से विदाई हो गई।
घर में सन्नाटा सा छा गया
आँसूओं का सहलाव आ गया।।

धीरे-धीरे घर मोहल्लें वालें
घर के नीचे जोड़ने लगे।
दबी जुबान से आपस में
मौत पर चर्चा करने लगे।।

खूबियों को गिनाने लगे
मृत के व्यवहार को बताने लगे।
सुनकर अपने बारे में
विचारों को जानने लगा।।

घर-परिवार वालों को देखा
उन्हें अच्छे से समझा।
कौन कितना चाहता है
और कौन क्या सोचता है।।

पत्नी की हालत खराब थी
उसकी अधूरी कुछ ख्यास थी।
जिन्हें हमें पूरा करना था
सच्चा साथी सिध्द करना था।।

लेकर अर्थी को कंधे पर
उस अंतिम मुकाम तक।
जहाँ एक दिन सब को
वहाँ निश्चित ही जाना है।।

जीवन का अंतिम सत्य है
जिसे सबको समझना है।
पैसे ख्याति का क्या है
बस खुदको मोक्ष पाना है।।

सुबह होते ही नींद खुल गई
जो सपना था टूट गया।
खुदको जिंदा देखकर
सत्य संसार का जान गया।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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