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तेरे बिना भी जी रहे हैं

तेरे बिना भी जी रहे हैं

डॉ. राकेश दत मिश्र

तेरे बिना भी जी रहे हैं,
मगर जीने का एहसास नहीं,
दिल में दर्द तो बहुत है,
मगर कहने को कोई पास नहीं।
तेरी यादों के साए में,
हर शाम मेरी ढल जाती है,
चेहरे पर मुस्कान रहती है,
पर आँखें सब कह जाती हैं।
तू जहाँ भी रहे, खुश रहे हर पल,
बस यही दुआ है मेरी,
तेरी राहों में खुशियाँ हों,
हर सुबह हो उजली तेरी।
तुझसे बढ़कर आज भी कोई,
मेरे दिल के इतने पास नहीं,
तू दूर सही मेरी ज़िंदगी से,
पर दिल से कभी दूर नहीं।
कभी मेरी याद आए तो,
बस इतना समझ लेना—
कोई आज भी तुझे चाहता है,
और तेरा नाम लेकर जीता है।

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