गरिमा , गौरव , मान , मर्यादा
अरुण दिव्यांशविश्व का गौरव देश भारत ,
तिरंगा जिसका पहचान है ।
सभ्यता संस्कृति है गरिमा ,
यह तिरंगा मर्यादा मान है ।।
प्राणों से प्यारा राष्ट्रगीत ये ,
जीवन सहारा राष्ट्रगान है ।
लहराते तिरंगे से तो पूछो ,
वह देता कैसा बयान है ।।
भारतीय ही हमारे रक्षक ,
भारतीयों में अंतर्ज्ञान है ।
भारतीयों से ही मैं सुरक्षित ,
यह भारत देश महान है ।।
घर घर मुझे नैन बसाया ,
हर हर गंगा ये हहराती है ।
नभ में तिरंगा धरा पे गंगा ,
ध्वज संग ही लहराती है ।।
विश्व में भारत की गरिमा ,
हमारा यहाॅं बहुत मान है ।
इनके बिन मैं भी अधूरा ,
पूर्ण करते मेरे अरमान हैं ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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