जगद्गुरु स्वामी शैलेन्द्र भारती की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा सम्पन्न

- "महापुरुष शरीर से विदा होते हैं, उनके विचार युगों तक समाज का मार्गदर्शन करते हैं" – डॉ. विवेकानंद मिश्र
गया। डॉ. विवेकानंद पथ, गोलबगीचा, गया में पूज्य जगद्गुरु स्वामी शैलेन्द्र भारती जी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर एक भव्य श्रद्धांजलि सभा एवं स्मरण समारोह का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े विद्वानों, संत-प्रेमियों, समाजसेवियों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर महान संत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन एवं पूज्य स्वामी शैलेन्द्र भारती जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत संत की पुण्य स्मृति को नमन किया तथा उनके तप, त्याग, राष्ट्रनिष्ठा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और लोककल्याण के लिए किए गए आजीवन समर्पण का स्मरण किया।
सभा को संबोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि पूज्य स्वामी शैलेन्द्र भारती जी केवल एक संन्यासी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के सशक्त प्रहरी, समाज सुधारक, आध्यात्मिक चिंतक और राष्ट्रचेतना के प्रेरक संत थे। उनका संपूर्ण जीवन कठिन संघर्षों, तपस्या और त्याग से परिपूर्ण रहा, किंतु उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन धर्म, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

डॉ. मिश्र ने कहा कि आज जब समाज अनेक प्रकार की वैचारिक एवं नैतिक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब स्वामी शैलेन्द्र भारती जी जैसे संतों के विचार और जीवन-दर्शन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का शरीर भले ही इस संसार से विदा हो जाता है, किंतु उनके विचार, संस्कार और आदर्श सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। यदि हम वास्तव में उन्हें श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो उनके बताए हुए सेवा, सदाचार, आत्मानुशासन और राष्ट्रभक्ति के मार्ग को अपने जीवन में अपनाना होगा।
प्रख्यात विद्वान आचार्य सचिदानंद मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में संत समाज के नैतिक पथ-प्रदर्शक होते हैं। स्वामी शैलेन्द्र भारती जी का जीवन तप, अनुशासन, सादगी, आध्यात्मिक साधना और लोकमंगल की भावना का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब वह अपने महापुरुषों के आदर्शों को केवल स्मरण ही नहीं बल्कि व्यवहार में भी उतारे।
भारतीय राष्ट्रीय जन क्रांति दल (डेमो) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संस्कृति, उसके संस्कार और उसके महापुरुषों की विरासत होती है। स्वामी शैलेन्द्र भारती जी ने अपने संपूर्ण जीवन से यह सिद्ध किया कि निःस्वार्थ सेवा, करुणा, त्याग, आत्मसंयम और समर्पण ही सच्चे धर्म की पहचान हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी ऐसे संतों के आदर्शों को आत्मसात करेगी तो भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में और अधिक सशक्त होकर आगे बढ़ेगा।
बिहार के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् मार्कण्डेय शारदे ने कहा कि महापुरुष कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होते, बल्कि उनके विचार समाज की चेतना में सदैव जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी शैलेन्द्र भारती जी ने अपने तप, ज्ञान और आध्यात्मिक साधना से समाज को जो दिशा प्रदान की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी स्वामी शैलेन्द्र भारती जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भारतीय संस्कृति, धर्म, सामाजिक समरसता तथा मानवीय मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया। उनके जीवन से प्रत्येक व्यक्ति को सेवा, त्याग, अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर पंडित बलमुकुंद मिश्र, दिनेश कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार, विनोद कुमार तिवारी, देवेंद्र बाबू, प्रेमनाथ टईया, शिवम गौड़, शंभू गुर्दा, प्रो. अशोक कुमार, हरि नारायण त्रिपाठी, मोहम्मद याहिया, राजीव नयन पाण्डेय, भूपाल रजक, डिंपल कुमारी, रूबी कुमारी, पुष्पा गुप्ता, पार्वती देवी, कुमारी पुष्पा राज, रंजना पाण्डेय, मृदुला मिश्रा, रीना सिंह, फूल कुमारी, दिलीप कुमार, नीरज वर्मा, धीरज वर्मा, विश्वजीत चक्रवर्ती, अभिजीत बनर्जी, रवि कुमार दास, सुरेश पासवान, शिवजी सिंह, शंभू गोस्वामी, नीरू कुमारी, मनीष कुमार, अमरनाथ, गीता वर्मा, शीतल चौबे, प्रो. डॉ. गीता पासवान, किरण पाठक, सौरभ कुमार, हृतिक कुमार, रणजीत पाठक, पवन मिश्रा, कमलकांत पाठक, हरिद्वार मिश्रा, महेश मिश्र, शारदा साहिबा, ताज इनायत, तस्लीमा, नुसरत परवीन, महजबी, शबनम, सोनी मिश्रा, चंदनी, आरिफ, राम केवल सिंह, सुनीता देवी, पुष्प देवी, मुन्नी देवी, ममता देवी, राखी कुमारी, नीलम कुमारी, कविता राउत, अच्युत मराठे, गुप्तेश्वर ठाकुर, प्यारी देवी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक शांति-पाठ, प्रार्थना एवं राष्ट्र एवं समाज के कल्याण की मंगलकामना के साथ हुआ। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे पूज्य स्वामी शैलेन्द्र भारती जी के बताए हुए धर्म, सेवा, सदाचार, सामाजिक समरसता, राष्ट्रहित एवं मानव कल्याण के मार्ग पर चलकर उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का सतत प्रयास करेंगे। श्रद्धांजलि सभा का वातावरण पूरे समय भक्ति, श्रद्धा, आत्मीयता और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।यदि यह समाचार किसी दैनिक समाचार-पत्र (जैसे दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर या राष्ट्रीय सहारा) में प्रकाशन हेतु है, तो मैं इसे और अधिक समाचार-पत्र शैली में आकर्षक शीर्षक, उपशीर्षक और पेशेवर संपादन के साथ भी तैयार कर सकता हूँ।
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