"आत्मोत्तीर्ण नेतृत्व"
पंकज शर्मा
नेतृत्व अधिकार का प्रदर्शन नहीं, आत्मा के विस्तार का उत्सव है। जो स्वयं के अहं को साध लेता है, वही दूसरों के अंतर्मन में सुप्त सामर्थ्य का आलोक जगा सकता है। नेतृत्व का वैभव अनुयायियों की संख्या में नहीं, उनके जागृत व्यक्तित्व में मापा जाता है।
सच्चा नेता स्वयं शिखर पर खड़े रहने से संतुष्ट नहीं होता; वह दूसरों के लिए भी शिखरों का सृजन करता है। उसका जीवन लोकमंगल की तपश्चर्या बन जाता है, जहाँ अपनी उपलब्धियाँ गौण एवं परहित की सिद्धियाँ प्रधान होती हैं। यही नेतृत्व की सर्वोच्च साधना एवं सफलता का शाश्वत स्वरूप है।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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