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खुश है वो

खुश है वो

संजय जैन


दर्द की मौत हो गई।
खुशी के आते ही जो।
शर्म हाया तो बची नही
आज के इस दौर में जो।।


चेहरा भले ही पुराना है
पर नये जैसा दिखता है।
दाग लगे हो दमन पर
पर सबको बेदाग दिखता है।।


खोकर अपना रूप भले ही
फिर भी सुंदर दिख रही हो।
रूप की रानी सुनने वाली
तुम क्यों चुपचाप खड़ी हो।।


होंठ गुलाबी आँख शराबी
चाल तुम्हारी रानी जैसी।
जिसको देखकर हँस दो
घायल होकर गिरता वो।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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