समय और शिक्षा की पुकार
डॉ. अनिता देवीसमय कहता है धीरे-धीरे,
मुझे व्यर्थ न गँवाना तुम,
मैं जो बीत गया एक बार,
फिर कभी न पाना तुम।
शिक्षा माँ की ममता जैसी,
जीवन को आकार देती है,
सूने मन के अंधियारे में,
ज्ञान का दीप जला देती है।
कितने बच्चे सपने लेकर,
पुस्तकों से नाता जोड़ते हैं,
कठिन परिस्थितियों में भी,
उम्मीद के दीप न छोड़ते हैं।
जिसने शिक्षा को अपनाया,
उसने जग में मान पाया,
मेहनत और समय के बल पर,
अपना सुंदर भविष्य बनाया।
समय की कीमत जो न समझे,
जीवन भर पछताता है,
बीत गए हर एक पल पर,
आँसू ही बरसाता है।
आओ बच्चों, आओ मिलकर,
एक नया संकल्प करें,
समय और शिक्षा के बल पर,
देश का उज्ज्वल कल्प करें।
शिक्षा से ही राष्ट्र सजेगा,
हर घर में खुशहाली आएगी,
ज्ञान और संस्कार की गंगा,
धरती पर मुस्कान बिखराएगी।
इसलिए हे मानव! याद रखो,
समय और शिक्षा अमूल्य धन हैं,
इनकी सच्ची कदर जो करता,
उसके जीवन में हजारों वसंत हैं।
लेखिका -डॉ. अनिता देवी शिक्षिका जिला पूर्वी चंपारण बिहार
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