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क्या हो रहा और क्यों हो रहा

क्या हो रहा और क्यों हो रहा

संजय जैन

आज के आधुनिक युग में बहुत बदलाव लोगों की सोच समझ में आ रहा है। जिसके कारण लोगों का विश्वास किसी का भी किसी पर नही हो रहा है। सभी को एक दूसरे से डर लगा रहता है की कही मेरे को....। या मेरे साथ कोई अनहोनी न हो जाये। पति पत्नी पर सबसे ज्यादा अविश्वास देखने में आ रहा है। भाई बहिन तो पहले भी प्रपार्टी के कारण विवादो मे रहते थे परंतु अब सबसे ज्यादा माहौल सभी समाज में पति पत्नी जैसे पवित्र रिश्तें में बिगड़ रहा है। सालों साथ रहकर भी आज की आधुनिकता की भेंट उनका रिश्ता चढ़ रहा है। यह सब पैसे के चकाचौँध और तरह-तरह के सीरियल देखकर यंग जवान बूढ़े सभी इसके शिकार हो रहे है। इसका दोष हम किसी को दे? न जाने कितने माँ बाप अपने बेटा बेटी के भविष्य के लिए चिंतित है। साथ बहुत से माँ बाप अपनी बेटियों का घर बर्वाद करा रहे है। आज कल एक नया रिवाज चल रहा है की शादी करके बेटी जो मायके गई तो लौटकर नही आ रही। वो पहली बार में अच्छा खासा पैसा और सोना चाँदी हीरा मोती के जेवर लेकर जाती है। नही लौटने का कारण ऐसा बताते है की लड़के वालों की जान निकल जाती है। और उन्हें लेने के देने पड़ने लगते है। पहले के समय में समाज के पंच आदि के सामने शादी ब्याह होते थे जो की उसके साक्षी होते थे और रिश्ते लोगों के बचे रहते थे। परंतु आज के समय में कोई भी रिश्तेदार नातेदार या पंच शादी ब्याह जैसे रिश्तों के बीच में नही पड़ते है। न ही किसी तरह की कोई जानकारी बताते है। क्योंकि क्या पता कल कुछ अनहोनी हो जाए और हम लोग उसमें फस जाये। इस कारण सभी लोग दूर रहते है। जिसके दुस्परिणाम हमें आज के समय देखने को मिल रहे है। कुछ लड़की के परिवारों ने इसे एक धन्धा बना लिया है। तो लड़के वाले भी इसमें पीछे नही है अपने निठले बिगड़ेल लड़की की शादी पैसे की दम पर कर लेते है। आज कल समाज में लड़कियाँ ज्यादा पढ़ी लिखकर अच्छा खासा पैसा और पद पर है। परंतु पुरुष प्रधान समाज होते हुए भी लड़को की हालत अच्छी नही है। जो काम बर्षो पहले लड़को के हाथ में थें। वो सब अब लड़कियों के हाथ मे पहुँच गए है। जिसका परिणाम आप देख सकते हो। एक पुरुष घर भर को अपने पैसे से पाल पोष देता है। परंतु महिला अपने पैसे से सास सुसर और देवर नंद आदि को कुछ नही दे सकती। यह आज का फर्क है। उन्नति हमें करना चाहिए आगे समाज और देश को बढ़ना चाहिए। परंतु अपनी और समाज की मान्य मर्यादाओं और संस्कारों को ध्यान में रखकर। परिवर्तन जरूरी है परंतु ऐसा परिवर्तन नही जिसकी हम सब को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़े। आज कल देश में शहर गाँव में कितनी घटनाएं हो रही है। इनका घटनाओं का जिमेमदार कौन है। और हम इन्हें कैसे रोक सकते है। या अपना मौन व्रत लेकर सिर्फ दर्शक बनकर सब कुछ होते देखते रहेंगे। शिक्षा का स्तर बड़ा है परंतु मानसिकता का स्तर बहुत नीचे गिरा है। जिसके लिए जिम्मेदार कौन है। यह प्रश्न सभी के लिए अब बहुत जटिल होता जा रहा है। मेरा लेख किसी की भावनाओं को या व्यक्ति विशेष को ठेस पहुँचाने और नीचे दिखाने के लिये नही है। समय की पुकार और अपने के प्यार को बनाये रखने के लिए जिम्मेदारियां हर किसी को अपने ऊपर लेना पड़ेगा तब जाकर कुछ परिवर्तन आयेगा। और समाज देश गाँव शहर के लोगों की सोच बदलेगी।। पुन: क्षमा चाहता हूँ यदि किसी की भावनाओं को ठेस लगी हो तो।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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