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पैसे ने जिंदगी को...

पैसे ने जिंदगी को...

संजय जैन

चलना जब सीख रहा था
तो गिरता बहुत था।
उठकर फिर से चलना
तभी तो सीख पाया।।


मुश्किल था वो दौर तब
जब लड़ना सीख लिया।
हालातों पर तब से ही
काबू करना सीख लिया।।


आज मेरा समय अच्छा है
इसलिए सबका झूकाव है।
मतलब की ये दुनिया है
और मतलब के ही लोग।।


पुरुषार्थ से ही खड़ा किया
मैंने अपने आपको।
न दिन देखा न रात देखा
तब जाकर सफलता पाया।।


ऊँची इमारतों में रहना ही
बड़े आदमी की निशानी नही।
बड़ा बनने के लिए यारों
दिलसे बड़ा होना चाहिए।।


देखा है अपने जीवन में
बड़े घरानों को मिटते हुए।
क्योंकि वो बाप कमाई को
नही बचा पाए अपने कर्मों से।।


पैसों ने ही अच्छों अच्छों को
मनचले और चंचल बना दिया।
जिंदगी को अच्छे से जीना
इसी पैसे ने जो सीखा दिया।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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