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करने आया हूँ

करने आया हूँ

संजय जैन
मानव जन्म लेकर
संसार में आया हूँ।
सपने अपने पूरे
करने को आया हूँ।।


अपने कर्मों का फल
अब भोगने आया हूँ।
माता-पिता की सेवा
करने को आया हूँ।।


श्रवण कुमार जैसा
बेटा बनना है।
मात-पिता के दुखो को
मुझको हरना है।।


राम के जैसा आज्ञाकारी
पुत्र बनकर दिखाना है।
माता-पिता के वाक्य को
साकार करके दिखाना है।।


माँ-बाप के कष्टों का
अब मुझे अंत करना है।
अपना कर्तव्य अब मुझे
कृष्ण के रूप में निभाना है।।


मानवता का वो कर्तव्य
मानव बनकर निभाना है।
एक-दूसरे के साथ मिलकर
इंसानियत को जिंदा रखना है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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