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शासकीय प्रतिबंध के बावजूद भूमि मापी! बलरामपुर में राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

शासकीय प्रतिबंध के बावजूद भूमि मापी! बलरामपुर में राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

बलरामपुर (रामानुजगंज), छत्तीसगढ़ | विशेष संवाददाता

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मानसून अवधि के दौरान भूमि मापी एवं सीमांकन पर लगाए गए प्रतिबंध के बीच बलरामपुर जिले के तातापानी पंचायत अंतर्गत लुरघुठा गांव में विवादित भूमि की मापी किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली तथा शासकीय आदेशों के अनुपालन को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलरामपुर तहसील की राजस्व निरीक्षिका श्रीमती अनीता बेक द्वारा 10 जुलाई 2026 को राजस्व अमले एवं अमीन के साथ लुरघुठा गांव स्थित एक भूमि का सीमांकन एवं मापी कराई गई। आरोप है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब छत्तीसगढ़ में 15 जून से 15 अक्टूबर तक भूमि मापी पर सामान्यतः प्रतिबंध लागू रहता है।

मामले को लेकर स्थानीय पक्षकारों का कहना है कि जिस भूमि की मापी की गई, वह विवादित है तथा उससे संबंधित राजस्व वाद संभागीय आयुक्त, अंबिकापुर के न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप यह भी लगाया गया है कि सह-खातेदारों को न तो पूर्व सूचना दी गई और न ही उनकी उपस्थिति में सीमांकन की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

छत्तीसगढ़ में हर वर्ष मानसून अवधि के दौरान खेतों में जलभराव, मेड़ों और सीमाचिह्नों के मिट जाने तथा फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के उद्देश्य से भूमि मापी एवं सीमांकन पर अस्थायी रोक लगाई जाती है। राजस्व नियमों के अनुसार विशेष परिस्थितियों, न्यायालय के आदेश, शासकीय परियोजनाओं अथवा कलेक्टर की विशेष अनुमति प्राप्त होने पर ही अपवादस्वरूप मापी की जा सकती है।

इसी आधार पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि किसी सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायालय का विशेष आदेश उपलब्ध नहीं था, तो प्रतिबंधित अवधि में सीमांकन की कार्रवाई किस आधार पर की गई।

प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव की चर्चा

मामले में कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव में कार्रवाई की गई हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय पक्षकारों एवं ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करने तथा यदि किसी प्रकार की नियम-विरुद्ध कार्रवाई हुई हो तो दोषियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि वास्तव में न्यायालय में विचाराधीन है और मापी संबंधी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, तो यह गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का विषय हो सकता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक राजस्व विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था। प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल यह प्रकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोग मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
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