जीविका ट्रेनिंग ऑफिसर प्रवीण कुमार पाठक को मिला 'डॉ. तारा सिंह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान-2026'

मुंबई/औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले में कार्यरत जिला जीविका कार्यालय के ट्रेनिंग ऑफिसर एवं प्रख्यात साहित्यकार प्रवीण कुमार पाठक को हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'डॉ. तारा सिंह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान-2026' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान मुंबई (महाराष्ट्र) की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'स्वर्गविभा' द्वारा प्रदान किया गया। संस्था ने एक गरिमामयी वर्चुअल/विशेष समारोह में उन्हें प्रशस्ति-पत्र एवं ट्रॉफी भेंट कर सम्मानित किया।
प्रवीण कुमार पाठक प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ साहित्य साधना में भी निरंतर सक्रिय हैं। उनकी लेखनी सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन मूल्यों को नई दृष्टि प्रदान करती है। हाल के वर्षों में प्रकाशित उनकी दो चर्चित कृतियाँ 'घुमंतू बाबा' और 'ज्ञान से समाधान' पाठकों एवं साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष रूप से सराही गई हैं।
'घुमंतू बाबा' में लेखक ने जीवन के विविध अनुभवों, यात्राओं और मानवीय संवेदनाओं का सजीव चित्रण किया है, जबकि 'ज्ञान से समाधान' में व्यावहारिक जीवन की जटिल समस्याओं का तार्किक एवं ज्ञानपरक समाधान प्रस्तुत किया गया है। इन दोनों पुस्तकों की साहित्यिक गुणवत्ता तथा समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचारों को इस राष्ट्रीय सम्मान का प्रमुख आधार माना गया।
इस अवसर पर 'स्वर्गविभा' परिवार से जुड़े देश के अनेक शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रवीण कुमार पाठक को शुभकामनाएँ दीं। संस्था के निदेशक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने कहा कि प्रवीण कुमार पाठक का लेखन समकालीन हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। वहीं मुंबई के रेडियो अधिकारी नवनाथ पावर ने उनकी जनसरोकारों से जुड़ी लेखनी की सराहना करते हुए इसे अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने की आवश्यकता बताई। चीफ मरीन इंजीनियर राजीव सिंह ने कहा कि औरंगाबाद जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाना पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है।
राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा के बाद औरंगाबाद के साहित्यिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मियों ने प्रवीण कुमार पाठक को बधाई देते हुए इसे बिहार के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। प्रबुद्धजनों का कहना है कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच साहित्य साधना का उनका निरंतर प्रयास युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रवीण कुमार पाठक ने कहा, "यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि बिहार की पावन मिट्टी और उन सभी पाठकों का है जिन्होंने मेरी कृतियों को स्नेह और सम्मान दिया। 'घुमंतू बाबा' और 'ज्ञान से समाधान' के माध्यम से मैंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की संवेदनाओं और संघर्षों को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। यह सम्मान मुझे भविष्य में और अधिक जिम्मेदारी और समर्पण के साथ साहित्य सृजन के लिए प्रेरित करेगा।"
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