सड़क परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर के साथ परिचर्चा का आयोजन

पटना, 05 जून, 2026:- बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और निजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से पथ निर्माण विभाग के द्वारा राज्य में सड़क परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर के साथ परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र के निवेशकों और हितधारकों को बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे के विकास में भागीदारी के अवसरों को तलाशने के लिए आमंत्रित करना है, जिससे राज्य की आर्थिक गति को और अधिक बल मिल सके। इस परिचर्चा में राज्य के प्रमुख राजमार्गों एवं अन्य मह्तवपूर्ण पथों एवं बड़े पुलों की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण , प्राइवेट इनवेंस्टर सहभागी के रूप में रखने पथ उपयोग शुल्क नियमावली, संविदा मसौदा सहित अन्य मह्तवपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
इस परिचर्चा में 1. आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर के अमिताभ मुरारका, 2. अडाणी रोड्स से शिखर रंजन एव शिबी करुणाकरण, 3. प्रकाश एस्फाल्टिंग एंड टोल (इंडिया) लिमिटेड के अजय सिंह, 4. एसपीएस कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से अरविंद कुमार पांडेय, 5. मेपल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जयदीप मणिक, 6. केएमसी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड से शशांक शेखर , 7. वर्टिस इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट से सावेद राउत एवं शिवनारायणा अमिपाली, 8. ए.आर. इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से एन साई एवं 9. नवयुगा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के एस. टी. रत्नगम शामिल हुए।
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बैठक को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री पंकज कुमार पाल , सचिव पथ निर्माण विभाग ने बताया कि बिहार देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक है तथा पिछले दो दशकों में राज्य ने अपने सड़क नेटवर्क के विस्तार, उन्नयन और रखरखाव में अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्तमान में बिहार सरकार के स्वामित्व में 3,617 किलोमीटर राजकीय राजमार्ग, 16,784 किलोमीटर मुख्य जिला सड़कें और लगभग 1.29 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। सड़क नेटवर्क का व्यापक विकास और इसके प्रभावी रखरखाव के कारण राज्य में यात्रा के समय में भारी कमी आई है।
सचिव ने कहा कि बिहार प्रदर्शन-आधारित सड़क संपत्ति रखरखाव प्रणाली (Performance-based Maintenance System) को लागू करने में देश का अग्रणी राज्य है। वर्तमान में, पथ निर्माण विभाग अपने प्रदर्शन-आधारित अनुबंध OPRMC के तहत 19,305 किलोमीटर सड़क नेटवर्क के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक को एकीकृत किया जा रहा है।
बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2024-25 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में बढ़ते डिस्पोजेबल आय और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण वाहनों के स्वामित्व में भारी उछाल आया है। पिछले सात वर्षों में बिहार में वाहन पंजीकरण की वार्षिक विकास दर लगभग 6% रही है। वर्ष 2011 से 2024 के बीच परिवहन और संचार क्षेत्र में बिहार ने 7.6% की विकास दर दर्ज की है, जो उत्तर प्रदेश (10.1%) और कर्नाटक (7.7%) के बाद देश में तीसरे स्थान पर है।

सड़क संपत्ति मुद्रीकरण के प्रथम चरण में लगभग 3,000 किलोमीटर राजकीय राजमार्गों और 40 से अधिक पुलों की पहचान की गई है। 'टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर' हेतु आधार राजस्व का सटीक आकलन तैयार करने की प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है। इस कार्य को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने हेतु संबंधित पदाधिकारी को निर्देशित कर दिया गया है।वहीं, अगले चरण में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत निर्माणाधीन लगभग 600 किलोमीटर प्रमुख राजमार्गों को भी एसेट मोनेटाइजेशन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
कंसल्टेशन मीट के दौरान उपस्थित प्रतिनिधियों के द्वारा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि बिहार में 'टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर' मॉडल, बेस रेट, रेवेन्यू शॉटफॉल , ट्रैफिक सर्वे, लोगों में टोल की राशि देने पर जागरूकता तथा परिसंपत्ति मुद्रीकरण की नई पद्धति को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। सचिव के द्वारा कंपनियों से प्राप्त बहुमूल्य सुझावों का स्वागत किया गया तथा बताया गया कि शेष स्वीकार सुधावों का भी नीति निर्धारण में समाविष्ट किया जा रहा है। सचिव के द्वारा आगे बताया गया कि एनएचएआई द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया का अध्ययन किया गया और रियायतग्राहियों के सभी सुझावों का ध्यान में रखकर ही प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इन सुझावों को राज्य की आगामी नीति निर्धारण में समाविष्ट करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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