Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

वो यादें और पल

वो यादें और पल

संजय जैन

याद है वो पल आज भी
जब हम तुम मिले थे।
लाख गिले शिकवे थे
पर दिल हमारे मिले थे।।

रोज लड़ते झगड़ते थे
फिर पुन: गले मिलते थे।
छोटी बड़ी सभी बातों को
हम आपस में बाँटते थे।।

अब ये कहाँ देखने और
कहने सुनने को मिलते है।
अब तो छोटी-छोटी बातों पर
बड़े-बड़े झगड़े कर लेते है।।

न ही रिश्तें और न रिश्तेंदार
अब हमारे और तुम्हारे बचें है।
जो रिश्तों की परिभाषा और
उनके महत्व को समझते है।।

स्वार्थ में इतने फस चुके है
बिना स्वार्थ के देखते नही है।
छोटी-छोटी खुशियाँ हमारी
स्वार्थ की भेंट चढ़ गई है।।

आज अकेले बैठ कर
उन पलों को सोच रहे है।
अपने जीवन का हम
मूल्यांकन कर रहे है।।

पल भर की खुशियाँ भी
बाँटने वाला कोई नही है।
समय अनुसार चलने की
लोगों की आदत बन गई है।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ