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मत करो वदनाम

मत करो वदनाम

संजय जैन

स्नेह-प्रेम का उपहार
अपनों से करें प्यार।
जीवन की ये सादगी
चलती रहे बस जिंदगी।।


काम से काम तक
धाम से धाम तक।
यू ही मिले रहे और
जिंदगी की गाड़ी चलती रहे।।


चलना तो आता नही
दौड़ लगाना सीख रहे।
गिरकर सभंलना सीखो
क्या लोगों को गिरा रहे।।


व्यक्तिवाद से बचना सीखो
परोपकार की तरफ बढ़ो।
तेरा मेरा करना छोड़ो
सबके साथ चलना सीखो।।


मन लगाकर पढ़ना सीखो
दिलका हाल समझना सीखो।
प्यार मोहब्बत के रिश्तों पर
कुछ तो विराम लगाना सीखो।।


आज अगर न रोके तो
अपवाहों का दौर बढ़ेगा।
बिना वजह ही उनका
सबके सामने नाम उछलेगा।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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