हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम
कुमार महेंद्रसुरसा-सा मुख फैलाए बैठा,
मुख्यधारा का यह दरबार।
सत्य सिमटकर कोनों में दुबका,
मुखरित केवल मिथ्या-प्रचार।
लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ,
सत्ता का आराधक अष्टयाम ।
हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम।।
जहाँ विमर्श उठने थे कल,
बेकारी और भुखमरी पर।
वहाँ बहसें उलझी रहती हैं,
राजनीतिक रायशुमारी पर।
कृषक, श्रमिक की व्यथा भुलाकर,
पढ़ते सत्ता-प्रशस्ति सुबह शाम।
हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम।।
अंगारों से दहके स्टूडियो,
मानो रण का आह्वान करें।
जन-मन के ज्वलंत प्रश्नों को,
प्रतिपल ही निष्प्राण करे।
शासक की प्रत्येक विफलता को,
छिपाने का करते शुभ काम।
हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम।।
चाटुकारिता की सीमाएँ,
लाँघ चुके ये चारण-भाट।
पीड़ित जनता मौन खड़ी है,
देख रही इनका वैभव-ठाट।
हाँ में हाँ की प्रतिध्वनि बन,
दिखाते कृत्रिम प्रगति अविराम।
हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम।।
यदि रीढ़विहीन पत्रकारिता,
राष्ट्र-चेतना का मान बने।
यदि प्रश्नों से भयभीत कलम,
सत्ता का ही गुणगान करे।
विवेक बंधक बन जाए जब,
नैतिकता हो जाती नीलाम।
हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम।।
सत्य दबाकर राष्ट्र कभी भी,
वैभव-शिखरों तक जाता नहीं।
प्रश्नों से जो मुँह मोड़े,
वह इतिहास नया रच पाता नहीं।
जनमत का प्रहरी बनना था,
पर सत्ता का बना गुलाम।
हे गोदी मीडिया, तुझे प्रणाम।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews