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धर्मरक्षिणी पंडा संघ ने बैकुंठधाम मंदिर परिसर में किया वृक्षारोपण

धर्मरक्षिणी पंडा संघ ने बैकुंठधाम मंदिर परिसर में किया वृक्षारोपण

  • पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक चेतना का दिया संदेश
पटना, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर धर्मरक्षिणी पंडा संघ द्वारा श्री गौरी शंकर बैकुंठधाम मंदिर परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, हरित जीवनशैली और धार्मिक स्थलों को स्वच्छ एवं हरा-भरा बनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारियों, तीर्थ पुरोहितों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए धर्मरक्षिणी पंडा संघ के अध्यक्ष रौशन पांडेय ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक पर्यावरणीय गतिविधि नहीं, बल्कि मानव जीवन और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का एक पवित्र प्रयास है। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बैकुंठधाम मंदिर में पौधारोपण कर “जीवन हरियाली” के उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान प्रकृति को नया जीवन देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की नींव रखते हैं।

इस अवसर पर तीर्थ पुरोहित एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुधांशु पांडेय ने कहा कि सनातन संस्कृति में वृक्षों और पौधों को देवतुल्य माना गया है। पीपल, बरगद, तुलसी और अन्य वृक्षों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व सदियों से हमारे जीवन का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि श्री गौरी शंकर बैकुंठधाम मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर वृक्षारोपण करने से न केवल परिसर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण भी और अधिक सशक्त होगा।

वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय असंतुलन को देखते हुए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। पेड़ वायु प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं, वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं तथा प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैकुंठधाम आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भविष्य में इन वृक्षों से ठंडी छाया, स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक सुकून प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि वृक्षों की जड़ें वर्षा के जल को धरती के भीतर पहुंचाने में सहायक होती हैं, जिससे भू-जल स्तर में सुधार होता है और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इस प्रकार वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संकट के समाधान में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में रवि बाबा, चिंटू बाबा, सोनू पांडेय, श्रीकांत पांडेय, लड्डू बाबा, संतोष बाबा सहित अनेक श्रद्धालु, तीर्थ पुरोहित और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने, धार्मिक स्थलों को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने तथा प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य काफी हद तक प्राप्त किया जा सकता है। वृक्षारोपण का यह अभियान धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के सुंदर समन्वय का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।

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