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बचपन की यादों से सेहत और पर्यावरण के सफर तक:'विश्व साइकिल दिवस'

बचपन की यादों से सेहत और पर्यावरण के सफर तक:'विश्व साइकिल दिवस'

जहानाबाद। हर साल 3 जून को दुनियाभर में ‘विश्व साइकिल दिवस’ (World Bicycle Day) बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस खास दिन को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2018 में की गई थी। इस अवसर पर जहानाबाद के प्रसिद्ध साहित्यकार व इतिहासकार सत्येंद्र कुमार पाठक ने साइकिल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दो शताब्दियों से उपयोग में आ रही साइकिल सिर्फ एक सवारी नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन माध्यम है।।साइकिल हमारी बचपन की सबसे प्यारी यादों से जुड़ी है—वो पहला संतुलन, गिरने-संभलने की जिद और खुली हवा में दोस्तों के साथ घूमना। लेकिन आज के डिजिटल युग में, जहाँ युवा पीढ़ी मोबाइल स्क्रीन और कारों में सिमट गई है, साइकिल कहीं पीछे छूटती जा रही है।
"साइकिल सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं, बल्कि एक सोच है—स्वस्थ रहने, प्रकृति से जुड़ने और ज़िंदगी को स्थायी कदमों से जीने की सोच।" - सत्येंद्र कुमार पाठकयह परिवहन का एक ऐसा सरल, किफायती और विश्वसनीय साधन है जो प्रदूषण मुक्त है। आज के दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को इसके फायदों के प्रति जागरूक करना है। आइए, इस 'विश्व साइकिल दिवस' पर हम सब मिलकर अपनी व्यस्त दिनचर्या में साइकिल को फिर से शामिल करने का संकल्प लें।
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