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बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने जारी किया एक वर्ष का रिपोर्ट कार्ड, संस्कृत शिक्षा में ऐतिहासिक उपलब्धियों का दावा

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने जारी किया एक वर्ष का रिपोर्ट कार्ड, संस्कृत शिक्षा में ऐतिहासिक उपलब्धियों का दावा

पटना, 15 जून 2026।
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री मृत्युंजय कुमार झा ने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोमवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बोर्ड का विस्तृत "एक वर्ष का रिपोर्ट कार्ड" जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने बीते एक वर्ष में बोर्ड द्वारा प्राप्त उपलब्धियों, किए गए सुधारों तथा भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी साझा की।

अध्यक्ष श्री झा ने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा, प्रशासन, डिजिटलीकरण और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव संस्कृत शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।

मध्यमा परीक्षा में अभूतपूर्व वृद्धि


रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए श्री झा ने बताया कि वर्ष 2026 की मध्यमा परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में जहां 13,241 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर लगभग 24 हजार तक पहुंच गई। उन्होंने इसे संस्कृत शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों और अभिभावकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया।

उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में पहली बार संस्कृत शिक्षा से जुड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में इतनी बड़ी वृद्धि हुई है, जो बोर्ड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत शिक्षा का प्रचार


अध्यक्ष ने बताया कि संस्कृत शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बोर्ड ने पहली बार सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग किया। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों तक नियमित रूप से सूचनाएं पहुंचाई गईं, जिससे संस्कृत शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ।

पहली बार बनी सरकारी वेबसाइट


श्री झा ने कहा कि बोर्ड के इतिहास में पहली बार इसकी अपनी सरकारी वेबसाइट विकसित की गई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया तथा परीक्षा परिणाम भी डिजिटल माध्यम से प्रकाशित किए गए। उन्होंने इसे बोर्ड के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

रिकॉर्ड समय में प्रकाशित हुआ परीक्षा परिणाम


उन्होंने जानकारी दी कि मध्यमा परीक्षा 2026 का परिणाम मात्र 27 दिनों में प्रकाशित कर दिया गया, जो बोर्ड के इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसके अलावा पहली बार पूरक (सप्लीमेंटरी) परीक्षा का आयोजन किया गया, जिससे असफल विद्यार्थियों को पुनः अवसर प्राप्त हुआ।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से समन्वय


संस्कृत शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर बोर्ड को सर्व शिक्षा अभियान से जोड़ने की पहल की। इस दिशा में शिक्षा मंत्रालय द्वारा सकारात्मक कदम उठाए गए हैं और शीघ्र ही इसका क्रियान्वयन शुरू होने की संभावना है।

मिला स्थायी कार्यालय


उन्होंने बताया कि लंबे समय तक बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पास अपना व्यवस्थित कार्यालय नहीं था। राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी के प्रयासों से बोर्ड को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति परिसर, बुद्ध मार्ग, पटना में प्रथम तल पर कार्यालय आवंटित किया गया। इससे प्रशासनिक कार्यों को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने में सहायता मिल रही है।

सीएसआर के माध्यम से संसाधन विकास की पहल


अध्यक्ष श्री झा ने बताया कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से संसाधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपये की राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इस राशि से आधुनिक कंप्यूटर लैब एवं अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

कर्मचारियों को मिला वर्षों से लंबित सेवांत लाभ


उन्होंने बताया कि बोर्ड के 14 कर्मियों को एक साथ सेवांत लाभ प्रदान किया गया, जो लंबे समय से लंबित था। इससे कर्मचारियों में संतोष और विश्वास का वातावरण बना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम


श्री झा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बोर्ड के पाठ्यक्रम का पुनर्गठन किया गया है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित विषयों के साथ आधुनिक, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को भी शामिल किया गया है, ताकि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध हो सके।

भविष्य की योजनाएं


अध्यक्ष ने बताया कि आने वाले वर्षों में बिहार के लगभग 40 संस्कृत विद्यालयों को मॉडल संस्कृत विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इन विद्यालयों में कंप्यूटर लैब, आईसीटी सुविधाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, खेल संसाधन तथा आधुनिक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई आधारित शिक्षण, भाषा प्रयोगशाला और तकनीक आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे संस्कृत शिक्षा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बन सके।

अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन की तैयारी


बोर्ड द्वारा एक परियोजना इकाई (PIU) के गठन की भी योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त बिहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर का संस्कृत विश्व सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें देश-विदेश के विद्वानों को आमंत्रित किया जाएगा।

रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर जोर


श्री झा ने बताया कि विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों, योग संगठनों तथा पतंजलि जैसी संस्थाओं के साथ एमओयू कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

ई-लर्निंग पोर्टल की होगी शुरुआत


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत शिक्षा के विस्तार के लिए बोर्ड शीघ्र ही ई-लर्निंग पोर्टल प्रारंभ करेगा, जिससे ऑनलाइन माध्यम से संस्कृत अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी।

जनजागरण कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन


संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए पूरे बिहार में गीता जयंती समारोह, गीता पाठ, संस्कृत दिवस समारोह तथा विभिन्न जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। अध्यक्ष श्री झा ने स्वयं बिहार के 38 जिलों में से 35 जिलों का दौरा कर विद्यालयों की स्थिति का निरीक्षण किया तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए।

बिहार को संस्कृत शिक्षा का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य


प्रेस वार्ता के अंत में अध्यक्ष श्री मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, बिहार सरकार के सहयोग तथा शिक्षा विभाग के समर्थन से बोर्ड ने एक वर्ष के भीतर अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में संस्कृत शिक्षा को आधुनिक, तकनीक-संपन्न और रोजगारोन्मुखी बनाकर बिहार को देश का अग्रणी संस्कृत शिक्षा राज्य बनाया जाएगा।इस अवसर पर बोर्ड के सदस्य श्री दुर्गेश कुमार राय, श्री चन्द्र किशोर कुमार, श्री धनेश्वर प्रसाद कुशवाहा, परीक्षा नियंत्रक श्री उपेन्द्र कुमार सहित बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।
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