"किनारे की पराजय"
पंकज शर्मासमुद्र का अंधकार
मुझे कभी भयावह नहीं लगा।
जो जल की अतल परतों में उतरते हैं,
वे कम-से-कम अपने प्रश्नों का पीछा करते हुए
किसी अज्ञात निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।
विनाश भी वहाँ एक प्रकार की पूर्णता है,
एक स्वीकृत परिणाम।
पर मैं उन पदचिह्नों को देखता हूँ
जो भीगी रेत पर बहुत दूर तक जाते हैं
और फिर अचानक लौट आते हैं।
जैसे किसी ने लहरों की पहली पुकार सुनकर
अपने ही भीतर के द्वार बंद कर लिए हों।
असंख्य यात्राएँ इसी प्रकार
आरंभ के निकट ही समाप्त हो जाती हैं।
मैं स्वयं से पूछता हूँ—
क्या पराजय वास्तव में गिर जाने में है,
या उस क्षण में
जब मन संभावना के विस्तृत आकाश को छोड़
सुरक्षित संकोच की शरण ले लेता है?
कितने जीवन ऐसे ही बीत जाते हैं,
अपने ही संदेहों की चौखट पर बैठे हुए।
गहराइयाँ तो कम-से-कम
मनुष्य से उसका समर्पण माँगती हैं;
किन्तु किनारे पर खड़ा भय
धीरे-धीरे उसकी दृष्टि हर लेता है।
वह डूबता नहीं,
फिर भी किसी अदृश्य रिक्ति में
प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा विलीन होता रहता है।
आज जब मैं अपने भीतर झाँकता हूँ,
तो पाता हूँ कि समुद्र बाहर नहीं, भीतर है।
मंज़िल भी कोई तट नहीं,
केवल आगे बढ़ते रहने की एक जिद है।
और सबसे गहरा शोक यही है—
कि मनुष्य लहरों से नहीं हारता,
कई बार वह अपने ही अनकहे भय के सामने
निस्तब्ध खड़ा रह जाता है।
. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️ "कमल की कलम से"✍️ (शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews