जुलाई 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार
हर हर महादेव!
मैं आप सबको और आप सबके हृदय में विराजमान ईश्वर को प्रणाम करता हूं, धन्यवाद करता हूं। अंग्रेजी कैलेंडर का जुलाई के महीने में भारतीय हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ और श्रावण का मिला-जुला महीना होता है।
1 जुलाई से 29 जुलाई 2023 तक आषाढ़ का महीना होगा। 30 जुलाई से 28 अगस्त तक श्रावण का महीना होगा। आषाढ़ और श्रावण माह के अधिपति देवी देवताओं को नमन करते हुए आइए हम चर्चा करते हैं जुलाई 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों के बारे में।
आषाढ़ का महीना भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा के लिए जाना जाता है।
आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि की वृद्धि हो गई है और दशमी तिथि का क्षय हो गया है। इस प्रकार आषाढ़ कृष्ण पक्ष 15 दिनों का हो गया है। जबकि आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूरे 15 दिनों का है।
3 जुलाई शुक्रवार को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा।
8 जुलाई बुधवार को श्री शीतला अष्टमी का व्रत होगा। इसे (बसियउरा - बासौड़ा) व्रत के नाम से भी जाना जाता है। बुधवार के दिन अष्टमी तिथि पड़ने के कारण आज के दिन का महत्व सूर्य ग्रहण के बराबर का हो जाता है। आज के दिन गेहूं का आटा और गुड़ का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
10 जुलाई शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत गृहस्थों के लिए होगा। वैसे तो आज सुबह 8:16 तक दशमी तिथि है उसके बाद एकादशी तिथि का प्रवेश होगा। अतः दशमी युक्त एकादशी का व्रत त्याग कर देना चाहिए। ऐसा व्रत करने से जीवन में दुखों का सामना करना पड़ता है।
11 जुलाई शनिवार को शुद्ध योगिनी एकादशी का व्रत होगा।
12 जुलाई रविवार को प्रदोष व्रत होगा। आज मासिक शिवरात्रि का व्रत भी होगा।
14 जुलाई मंगलवार को स्नान दान श्राद्ध की अमावस्या होगी। आज भौमवती अमावस्या है।
15 जुलाई बुधवार को इष्टि है।
आज से गुप्त नवरात्र प्रारंभ होगा। इसे आषाढ़ नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। आज ही दोपहर के बाद द्वितीया तिथि के प्रवेश कर जाने के कारण शाम को द्वितीया के चंद्रमा का दर्शन होगा।
16 जुलाई गुरुवार को जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा बड़े धूमधाम से निकलेगी। देश विदेशों में भी आज के दिन भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकाली जाएगी।
17 जुलाई शुक्रवार को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा।
आज कर्क संक्रांति है। आज से सूर्य दक्षिणायन हो जाएंगे।
20 जुलाई सोमवार को श्री स्कंद षष्ठी का व्रत होगा।
23 जुलाई गुरुवार को गंधर्व नवमी होगा। आज गुप्त नवरात्र समाप्त हो जाएगी। आज के दिन नवरात्रि से संबंधित हवन यज्ञ आदि करने के बाद व्रत का पारण कर लिया जाएगा।
24 जुलाई शुक्रवार को उल्टा रथ पुर्नयात्रा उड़ीसा प्रांत के जगन्नाथ पुरी में मनाया जाएगा।
25 जुलाई शनिवार को श्री हरि शयनी एकादशी का व्रत गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा। आज के दिन सृष्टि के समस्त जीव जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु भगवान की विधिवत पूजा अर्चना करके उन्हें योग निद्रा में शयन करा दिया जाएगा। भगवान श्री हरि विष्णु जी की इस योग निद्रा की अवधि 4 महीने की होती है। जिसके कारण चतुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश इत्यादि मांगलिक कार्य स्थगित हो जाते हैं। साधु संत एक जगह स्थित होकर भजन कीर्तन, प्रवचन इत्यादि धार्मिक कार्य करते हैं।
26 जुलाई रविवार को प्रदोष व्रत होगा।
28 जुलाई मंगलवार को कोकिला व्रत होगा। उड़ीसा प्रांत में आज के दिन शिव शयन चतुर्दशी का त्यौहार मनाया जाता है। आज अंबिका व्रत भी है।
29 जुलाई बुधवार को स्नान दान व्रत की पूर्णिमा होगी। आज गुरु पूर्णिमा है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
आज के दिन प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने गुरुओं का विशेष आदर सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आज के दिन अपने-अपने धर्मगुरु, पंथ गुरु, मंत्र गुरु तथा विद्या देकर किसी भी विधा में ज्ञान देने वाले गुरुजनों को ब्रह्मा विष्णु महेश के सदृश मानते हुए अपनी श्रद्धा भक्ति के अनुसार, अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनकी पूजा करना चाहिए तथा उपहार आदि देकर सम्मान करना चाहिए। पूराण सहित समस्त धार्मिक ग्रंथो के रचयिता के रूप में आदि गुरु श्री वेदव्यास मुनि जी की आज विशेष पूजा की जाएगी। काशी स्थित श्री व्यास मंदिर में विशेष रूप से दर्शन पूजन का विधान है। आज के दिन ग्रामीण परिवेश में गाय के गोबर से अपने घरों को गोंठ देने से सांपों का भय नहीं रहता।
30 जुलाई गुरुवार को इष्टि है। आज से श्रावण मास आरंभ हो जाएगा।
31 जुलाई शुक्रवार को चंद्रोदय व्यापिनी द्वितीया तिथि के कारण अशून्यशयन व्रत होगा।
भविष्यवाणी
6 जुलाई सोमवार को रात 9:48 पर भगवान सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। जिसके कारण बहुत अच्छी वर्षा होगी। पृथ्वी जलमग्न हो जाएगी। 2 जुलाई के आसपास भी शानदार वर्षा होगी तथा जुलाई के दूसरे सप्ताह में 10 से 12 जुलाई के आसपास अत्यधिक वृष्टि होने के,अधिक बरसात होने के संकेत मिल रहे हैं। 15 जुलाई के आसपास भी तीव्र गति से बारिश होगी।
17 जुलाई शुक्रवार को दिन में 10:50 पर भगवान सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ सूर्य दक्षिणायन हो जाएंगे। 20 जुलाई की रात 11:07 पर भगवान सूर्य पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। जिसके कारण आसमान में बादलों के प्रबल घेराव के साथ सामान्य से अधिक वर्षा होने के योग बन रहे हैं। उत्तर और दक्षिण भारत में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाएगी।
ज्ञानवर्धक जानकारी
मनुष्य के शरीर में मेलेनिन नामक रसायन के कम होने की वजह से शरीर के बाल विशेष रूप से सिर के बाल सफेद होने लगते हैं। अतः मेलेनिन का उत्पादन शरीर में अगर संतुलित मात्रा में बढ़ा दिया जाए तो बालों का सफेद होना रुक जाता है। बाल काले होने लगते हैं। वैसे तो खान-पान पर नियंत्रण आवश्यक होता है। किंतु योग विज्ञान में एक ऐसा प्रयोग बताया गया है जिसके करने से शरीर में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ जाता है। मुट्ठी बांधकर दूसरे हाथ के अंगूठे से अपनी कलाई के मणिबंध के ऊपर अगर मालिश किया जाए तो शरीर में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ जाता है। कारण कि मानव शरीर में कलाई के पास नाड़ियों का गुच्छा होता है। अर्थात हमारे मस्तिष्क से निकलने वाली बहुत सी नाड़ियां यहां पर आकर इकट्ठी होती हैं। जब अपनी कलाई के ऊपर अंगूठे से मालिश किया जाता है तो नाड़ियों पर एक दबाव बनता है। जिससे मस्तिष्क में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ जाता है। यदि लंबे समय तक अपने सिर के बाल को काला रखना चाहते हैं तो दोनों हाथ की कलाइयों को अपने अंगूठे से प्रतिदिन थोड़ी देर मालिश करें और उसका चमत्कार देखें।
दिव्य महाप्रयोग
वशीकरण का एक महा प्रयोग
ऊं से तीन व्याहृतियां निकलती हैं। तीन व्याहृतियों से गायत्री मंत्र बनता है और गायत्री से चारों वेदों का निर्माण होता है।
यह तीन व्याहृतियां बहुत शक्तिशाली होती हैं इनका प्रयोग करके श्रेष्ठ वशीकरण प्राप्त किया जा सकता है साथ ही शारीरिक रोग व्याधियों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
वशीकरण नेत्रों से होता है विशेष रूप से तीसरे नेत्र अर्थात आज्ञा चक्र से होता है अतः अपने नेत्रों में वशीकरण की शक्ति को प्रकट करने के लिए प्रतिदिन स्नान करने के बाद अपने दाहिने हाथ अर्थात Right Hand की अनामिका उंगली और अंगूठा के सिरे को मिलाकर अपने दोनों भौहों के बीच में अर्थात आज्ञा चक्र पर रखकर इन्हीं तीन व्याहृतियों *ऊं भू:, ऊं भूव:, ऊं स्व:* मंत्र का उच्चारण कम से कम 2 मिनट लगातार करें। 27 दिनों के बाद इस मंत्र का चमत्कार देखने को मिलने लगता है! यदि लगातार इस प्रयोग को किया जाए तो व्यक्ति की आंखों में एक बड़ा ही तेज और आकर्षण उत्पन्न हो जाता है।
इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति हमेशा रोगी रहता है। अर्थात एक रोग जाता है, दूसरा रोग आता है। व्यक्ति प्रायः बीमारियों से घिरा रहता है। रोग बीमारियां समाप्त नहीं हो रही हैं तो ऐसी स्थिति में प्रतिदिन स्नान करने के बाद अपने दाहिने हाथ Right Hand की अनामिका उंगली और अंगूठे के सिरे को आपस में मिलाकर उसे अपने नाभि चक्र पर रखकर इन्हीं तीन व्याहृतियों का अर्थात *ऊं भू:, ऊं भुव:, ऊं स्व:* मंत्र का लगातार 2 मिनट तक जाप करें। इससे अद्भुत चमत्कारिक लाभ होता है। 27 दिनों के बाद इसका शुभ परिणाम प्राप्त होने लगता है। यदि इसे लगातार नियमित रूप से किया जाए तो व्यक्ति का शरीर हृष्ट-पुष्ट, स्वस्थ हो जाता है।
लेखक:रवि शेखर सिन्हा उर्फ आचार्य मनमोहन। ज्योतिष मार्तंड एवं जन्म कुण्डली विशेषज्ञ।
इति शुभमस्तु!!
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