अमूल्य धरोहर : मां
दुर्गेश मोहनमां मेरी अलौकिक निधि,
जग जननी है मेरी।
भाग्य फैसला करने वाली,
अमूल्य धरोहर है मेरी।
संस्कृति को बढ़ाने वाली,
संसार को बसाने वाली।
पुत्र हेतु चिंता करने वाली,
दुखों को हरने वाली।
मेरी अमूल्य माता है।
मेरी भाग्य विधाता है।
ममता की करुणा निधि,
प्यास की तृप्ति करने वाली।
प्यार की संचित विधि,
गलती को माफ़ करने वाली।
मेरी अमूल्य माता है।
मेरी भाग्य विधाता है।
दुर्गेश मोहन
बिहटा,पटना(बिहार)
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