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श्रम साधना, विकास की आराधना

श्रम साधना, विकास की आराधना

कुमार महेंद्र
श्रम ही सृजन का आधार है, और साधना ही विकास का मार्ग।
हर पसीने की बूंद में छिपा है उज्ज्वल भविष्य का प्रकाश।
आइए, इस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर श्रम की गरिमा को नमन करें और प्रगति के पथ पर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।
"श्रम साधना, विकास की आराधना" — यही बने जीवन का मंत्र।
कुमार महेंद्र


(अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस _2026)
श्रम साधना, विकास की आराधना
शाश्वतता का दिव्य श्रृंगार,
सृष्टि का अलौकिक विधान।
आशा, उमंग, उल्लास अथाह,
सुख समृद्धि का सतत आह्वान ।
पटाक्षेप हो सघन तिमिर का,
हर कदम हो आलोक साधना।
श्रम साधना, विकास की आराधना।।


लोभ, मद, लालच, अहंकार—
जड़ता के मूल अभिशाप।
धर अदम्य साहस और शौर्य,
हरे असुर प्रवृत्ति का संताप।
दानवी बाधाओं के आगे,
सत्य बने जग का आईना।
श्रम साधना, विकास की आराधना।।


समाज, राष्ट्र, दैनिक जीवन—
शुभ मंगल का हो विस्तार।
समस्या का सही समाधान,
आदर्श चरित्र बने आधार।
दृढ़ संकल्प, नैतिक पथ पर,
झूठ-पाखंड की हो अवमानना।
श्रम साधना, विकास की आराधना।।


स्नेह-विहीन हो मानव पथ,
मिटे मनगढ़ंत परिभाषाएँ।
नैराश्य की उस अंतिम बेला में,
जागे नव आनंदी अभिलाषाएँ।
राष्ट्रधरा नित सुहावन लगे,
प्रगति बने जन हृदय की कामना।
श्रम साधना, विकास की आराधना।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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