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"अंतर्ज्ञान और तर्क का समन्वय"

"अंतर्ज्ञान और तर्क का समन्वय"

पंकज शर्मा
प्रिय मित्रों मनुष्य के भीतर अंतर्ज्ञान एवं तर्क दो महत्वपूर्ण शक्तियाँ हैं। अंतर्ज्ञान वह सूक्ष्म प्रकाश है, जो बिना तर्क के भी सत्य का आभास करा देता है, जबकि तर्क विचारों को दिशा देने वाला साधन है। आधुनिक समय में हमने तर्क को इतना प्रधान बना दिया है कि अंतर्ज्ञान की सहज आवाज़ दबने लगी है। परिणामस्वरूप, हमारे समस्त निर्णय यांत्रिक तो हो ही जाते हैं, पर उनमें संवेदनशीलता एवं गहराई का अभाव भी रह जाता है। वास्तव में, अंतर्ज्ञान ही वह आधार है, जहाँ से सच्चे एवं सार्थक निर्णय जन्म लेते हैं।

हमारे जीवन की सार्थकता इसी में है कि तर्क, अंतर्ज्ञान का मार्गदर्शक नहीं, बल्कि सहयोगी बने। जब हम अपने भीतर की सूक्ष्म चेतना को सुनते हैं, तब हमारे निर्णय अधिक संतुलित एवं मानवीय हो जाते हैं। आज आवश्यकता है कि हम उस अंतर्मन की पुकार को पुनः पहचानें एवं उसे सम्मान दें। यही संतुलन जीवन को केवल तर्कसंगत नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण एवं प्रेरणादायक बनाता है।

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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