माँ विंध्यवासिनी धाम - विंध्याचल स्टेशन पर बढाई जाय ट्रेनों का ठहराव : निलेश रंजन

दिव्य रश्मि के उपसंपादक जितेन्द्र कुमार सिन्हा की कलम से।
भारत की धार्मिक परंपरा में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। उत्तर प्रदेश के विंध्याचल में स्थित माँ विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बिहार की राजधानी पटना सहित आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त प्रतिदिन विंध्याचल जाते हैं। मां के प्रति श्रद्धा और आस्था लोगों को लंबी यात्राएं करने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन यात्रा की सुविधाओं का अभाव भक्तों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है।
पटना के कृष्णापुरी निवासी निलेश रंजन ने भारत सरकार के रेल मंत्री को पत्र लिखा है और बताया है कि पटना से हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु माँ विंध्यवासिनी के दर्शन हेतु विंध्याचल धाम जाते हैं। इनमें महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और परिवार के साथ यात्रा करने वाले श्रद्धालु भी शामिल रहते हैं। लेकिन रेलवे की सीमित सुविधाओं के कारण इन भक्तों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि विंध्याचल रेलवे स्टेशन, जिसका स्टेशन कोड बीडीएल (BDL) है, एक महत्वपूर्ण धार्मिक और यात्री केंद्र है। यह स्टेशन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से लगभग 70 किलोमीटर पश्चिम तथा प्रयागराज जंक्शन से लगभग 80 किलोमीटर पूर्व स्थित है। धार्मिक दृष्टि से इसकी महत्ता अत्यधिक है क्योंकि यह सीधे माँ विंध्यवासिनी धाम से जुड़ा हुआ है। इतना महत्वपूर्ण स्टेशन होने के बावजूद यहां लंबी दूरी की ट्रेनों का पर्याप्त ठहराव नहीं होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। कई प्रमुख ट्रेनें यहां से गुजरती तो हैं, लेकिन उनका ठहराव नहीं होने से श्रद्धालुओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
श्री निलेश रंजन ने बताया कि पटना से विंध्याचल आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी समस्या ट्रेनों की कमी है। वर्तमान स्थिति में पटना लौटने के लिए दिनभर में केवल एक या दो ट्रेनें ही उपलब्ध हैं। दर्शन और पूजा के बाद भक्तों को घंटों स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि परिवार के साथ आए श्रद्धालुओं को पूरी रात या लंबे समय तक स्टेशन परिसर में समय बिताना पड़ता है। गर्मी, भीड़ और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में बुजुर्ग और बच्चों को विशेष रूप से परेशानी झेलनी पड़ती है। यात्रियों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर यात्रा सुविधाओं को अधिक बेहतर बनाया जाना चाहिए, ताकि लोगों की आस्था को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
उन्होंने बताया है कि भक्तगणों ने रेलवे प्रशासन के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने आग्रह किया है कि गाड़ी संख्या 12141 पाटलिपुत्र सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा गाड़ी संख्या 12142 मुंबई एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस का ठहराव विंध्याचल स्टेशन पर सुनिश्चित किया जाए। इन ट्रेनों का ठहराव होने से पटना और बिहार के अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी। यात्रियों को दर्शन के बाद लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनकी यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सकेगी। इसके अलावा, इन ट्रेनों का ठहराव केवल श्रद्धालुओं को ही नहीं बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी गति प्रदान करेगा। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।
श्री रंजन ने बताया कि रेलवे केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोगों की भावनाओं और जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है। जब किसी धार्मिक स्थल पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हो, तब वहां परिवहन सुविधाओं को प्राथमिकता देना आवश्यक हो जाता है। पटना के माँ विंध्यवासिनी भक्तों की यह मांग किसी व्यक्तिगत सुविधा की नहीं है, बल्कि हजारों यात्रियों की सामूहिक आवश्यकता का प्रतीक है। रेलवे प्रशासन को इस जनभावना को गंभीरता से समझना चाहिए और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए।
माँ विंध्यवासिनी के भक्तों की यह मांग केवल ट्रेन के एक अतिरिक्त ठहराव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की सुविधा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। यदि पाटलिपुत्रा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और मुंबई एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस का ठहराव विंध्याचल स्टेशन पर किया जाता है, तो हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। आस्था और सुविधा का संतुलन ही बेहतर व्यवस्था की पहचान है। उम्मीद की जानी चाहिए कि रेलवे प्रशासन भक्तों की इस उचित मांग पर सकारात्मक विचार करेगा और माँ के भक्तों की यात्रा को अधिक सरल एवं सुखद बनाएगा। —-------------
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