Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

माँ लक्ष्मी की परीक्षा

माँ लक्ष्मी की परीक्षा

लेखक: आनन्द हठीला

एक बार भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान थे। कई वर्षों से वे धरती लोक पर नहीं गए थे। एक दिन उनके मन में पृथ्वी भ्रमण का विचार आया। वे यात्रा की तैयारी करने लगे। उन्हें तैयार होता देखकर माँ लक्ष्मी ने पूछा-
“प्रभु! आज प्रातःकाल कहाँ जाने की तैयारी हो रही है?”

भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले-“हे लक्ष्मी! मैं धरती लोक की सैर करने जा रहा हूँ।”

माँ लक्ष्मी ने विनम्रता से कहा-“यदि आज्ञा हो तो मैं भी आपके साथ चलना चाहती हूँ।”
भगवान विष्णु कुछ क्षण विचार में पड़े, फिर बोले-
“तुम मेरे साथ चल सकती हो, लेकिन एक शर्त है-धरती पर पहुँचने के बाद उत्तर दिशा की ओर बिल्कुल मत देखना।”

माँ लक्ष्मी ने सहमति में सिर हिला दिया।

अगली सुबह दोनों धरती लोक पहुँचे। वर्षा अभी-अभी थमी थी। चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। उगते सूर्य की सुनहरी किरणें पृथ्वी की सुंदरता को और भी मनोहर बना रही थीं। वातावरण शांत और सुगंधित था। माँ लक्ष्मी प्रकृति की छटा में इतनी मोहित हो गईं कि वे भगवान विष्णु को दिया अपना वचन भूल बैठीं।

धीरे-धीरे उनकी दृष्टि उत्तर दिशा की ओर चली गई। वहाँ उन्होंने एक अत्यंत सुंदर पुष्प-वाटिका देखी। रंग-बिरंगे फूलों की सुगंध वातावरण में घुली हुई थी। आकर्षणवश वे उस बगीचे में चली गईं और एक सुंदर पुष्प तोड़ लिया।

जब वे वापस भगवान विष्णु के पास पहुँचीं तो देखा कि उनकी आँखों में आँसू थे।

भगवान विष्णु ने गंभीर स्वर में कहा-
“हे लक्ष्मी! बिना अनुमति किसी की वस्तु लेना उचित नहीं है। तुमने माली के बगीचे से बिना पूछे फूल तोड़ा है, यह चोरी के समान है। साथ ही तुमने अपना वचन भी भंग किया है।”

माँ लक्ष्मी को अपनी भूल का अहसास हुआ। उन्होंने क्षमा माँगी, परंतु भगवान विष्णु बोले-

“हर कर्म का फल मिलता है। तुम्हें इस भूल का प्रायश्चित करना होगा। जिस माली के खेत से तुमने फूल तोड़ा है, उसके घर तुम्हें तीन वर्ष तक सेविका बनकर रहना होगा।”

माँ लक्ष्मी ने सिर झुकाकर दंड स्वीकार कर लिया।

इसके बाद माँ लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धारण किया और उस बगीचे के मालिक माधव के घर पहुँचीं। माधव एक गरीब किसान था। उसकी पत्नी, दो पुत्र और तीन पुत्रियाँ थीं। छोटा-सा खेत ही उनके जीवन-यापन का सहारा था।

माँ लक्ष्मी ने दरवाज़े पर जाकर कहा-
“भैया, मैं एक असहाय स्त्री हूँ। कई दिनों से भूखी हूँ। मुझे कोई छोटा-मोटा काम दे दीजिए। बदले में मैं घर का काम भी कर दूँगी। बस रहने के लिए एक कोना मिल जाए।”

दयालु हृदय वाले माधव ने कहा-
“बहन, मैं बहुत गरीब हूँ। बड़ी कठिनाई से परिवार का पालन होता है। लेकिन यदि मेरी तीन बेटियों की जगह चार बेटियाँ होतीं, तब भी मैं उन्हें पालता। यदि तुम हमारी बेटी बनकर सादा जीवन स्वीकार कर सको तो भीतर आ जाओ।”

माधव ने उन्हें अपने घर में स्थान दे दिया।

जिस दिन माँ लक्ष्मी उस घर में आईं, उसी दिन से मानो माधव का भाग्य बदलने लगा। अगले ही दिन फूलों की अच्छी बिक्री हुई और उसने एक गाय खरीद ली। धीरे-धीरे उसकी आमदनी बढ़ती गई। उसने और ज़मीन खरीदी, पक्का घर बनवाया, परिवार के लिए अच्छे वस्त्र और गहने बनवाए। घर में सुख-समृद्धि आने लगी।

माधव हमेशा सोचता-
“यह सब इस बेटी के आने के बाद ही हुआ है। यह साधारण स्त्री नहीं, मेरी किस्मत है।”

समय बीतता गया। कई वर्ष निकल गए, पर माँ लक्ष्मी उसी घर में सादगी से सेवा करती रहीं।

एक दिन जब माधव खेत से लौटकर आया तो उसने घर के बाहर एक तेजस्वी देवी को खड़े देखा। वे बहुमूल्य आभूषणों से अलंकृत थीं। ध्यान से देखने पर वह आश्चर्यचकित रह गया-

“अरे! यह तो मेरी चौथी बेटी के रूप में रहने वाली वही स्त्री है… यह तो स्वयं माँ लक्ष्मी हैं!”

पूरा परिवार बाहर आ गया। सभी हाथ जोड़कर खड़े हो गए।

माधव भावुक होकर बोला-
“हे माँ! हमें क्षमा कर दीजिए। हमने अनजाने में आपसे घर और खेत का काम करवाया। हमसे बड़ा अपराध हो गया।”

माँ लक्ष्मी मुस्कुराईं और बोलीं-

“हे माधव! तुम अत्यंत दयालु और निर्मल हृदय के व्यक्ति हो। तुमने मुझे बेटी और परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया। मैं तुमसे प्रसन्न हूँ। मेरा आशीर्वाद है कि तुम्हारे घर में कभी धन और सुख की कमी नहीं होगी।”

इतना कहकर माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु द्वारा भेजे गए दिव्य रथ में बैठकर बैकुण्ठ लोक लौट गईं।
शिक्षायह कथा हमें सिखाती है कि दया, विनम्रता और मानवता सबसे बड़ा धर्म है। जो लोग गरीबों, असहायों और अतिथियों का सम्मान करते हैं, वहाँ स्वयं माँ लक्ष्मी का निवास होता है। साथ ही यह भी कि बिना अनुमति किसी की वस्तु लेना अनुचित है और हर कर्म का फल अवश्य मिलता है।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ