आओ, अब एक कप चाय हो जाए
कुमार महेंद्रचाय केवल स्वाद नहीं,
कभी सुकून बनकर मिलती है,
कभी रिश्तों की मिठास बन जाती है।
कुछ बातें, कुछ मुस्कानें और
थोड़ा सा अपनापन लेकर प्रस्तुत है मेरी स्वरचित रचना —
🌿 “आओ, अब एक कप चाय हो जाए” 🌿
उषा-किरण संग प्रथम चुस्की,
जीवन का उत्सवमय आधार।
सहज स्नेहिल आवभगत का,
सरस परंपराओं का संस्कार।
इतराती प्रियसी-सी चंचल,
मन में मधुर उमंग जगाए।
आओ, अब एक कप चाय हो जाए।।
मृदुल मधुर संवाद-सेतु यह,
चिंतन-मनन का सुंदर ठौर।
उष्ण स्वभाव, शीतल प्रभाव,
हर उलझन का सहज छोर।
चिंता-तनाव क्षण में हरकर,
हास्य-परिहास अधरों पर लाए।
आओ, अब एक कप चाय हो जाए।।
कार्यालय हो या उत्सव-बेला,
सर्वत्र इसे सम्मान मिले।
नैराश्य, थकानें दूर भगाकर,
जीवन में नव उल्लास खिले।
“अतिथि देवो भव” की गरिमा,
हर अंतर में सरसता लाए।
आओ, अब एक कप चाय हो जाए।।
हर आयु-वर्ग की प्रिय चाहत,
मैत्री-बंधन सदैव सदाबहार।
श्रम-विराम की मधुर संगिनी,
लक्ष्य-साधना का दृढ़ आधार।
नेह-निमंत्रण की सौंधी खुशबू,
मुख पर मधुर मुस्कान सजाए।
आओ, अब एक कप चाय हो जाए।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews