युवाओं का बल या व्यवस्था की विफलता?

- “सात निश्चय” के सपनों से दूर होता जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र
संवाददाता लक्ष्मण पाण्डेय की खबर
पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार जी के द्वारा शुरू की गई “सात निश्चय” योजना बिहार की राजनीति और विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी गई। इस योजना का उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि बिहार के युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी था। इन्हीं सात निश्चयों में एक प्रमुख संकल्प था - “आर्थिक हल, युवाओं को बल”।
इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने दो बड़ी व्यवस्थाएँ शुरू कीं -
- स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना
- जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र (DRCC)
इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य था कि बिहार का कोई भी युवा आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे तथा उसे सही मार्गदर्शन और परामर्श मिल सके। प्रारंभिक दिनों में यह योजना युवाओं के लिए आशा की किरण बनकर उभरी। हजारों छात्रों ने उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ लिया और जिला निबंधन सह परामर्श केंद्रों पर युवाओं की लंबी कतारें दिखाई देती थीं।
लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति बदलती चली गई। आज जब कोई व्यक्ति कई जिलों के DRCC केंद्रों का दौरा करता है, तो वहाँ न तो युवाओं की वह उत्साहपूर्ण भीड़ दिखाई देती है और न ही “परामर्श” की वह व्यवस्था, जिसकी कल्पना की गई थी। कई स्थानों पर ये केंद्र केवल औपचारिक कार्यालय बनकर रह गए हैं।
सपनों से हकीकत तक
जब यह योजना शुरू हुई थी, तब इसे बिहार के शिक्षा और रोजगार क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम माना गया। सरकार का दावा था कि गरीब परिवार का छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक या प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा कर सकेगा।
DRCC केंद्रों की स्थापना इसी सोच के साथ की गई थी कि वहाँ प्रशिक्षित परामर्शदाता युवाओं को सही दिशा देंगे -कौन सा कोर्स करें, कहाँ दाखिला लें, किस प्रकार ऋण प्राप्त करें, कौशल प्रशिक्षण कैसे लें, रोजगार के अवसर क्या हैं आदि।
परंतु आज अनेक युवाओं की शिकायत है कि केंद्रों पर न तो समुचित जानकारी मिलती है और न ही समय पर कार्य होता है। कई जगहों पर कर्मचारी केवल कागजी औपचारिकताएँ पूरी करते नजर आते हैं।
युवाओं की घटती उपस्थिति क्यों?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन केंद्रों को युवाओं का मार्गदर्शन केंद्र बनना था, वहाँ आज युवा क्यों नहीं दिखते? इसके पीछे कई कारण हैं -
1. परामर्श की गुणवत्ता में गिरावट
कई जिलों में प्रशिक्षित काउंसलर की कमी है। युवा जब अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचते हैं, तो उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। परिणामस्वरूप वे निजी एजेंसियों या इंटरनेट पर निर्भर हो जाते हैं।
2. जटिल प्रक्रियाएँ
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई कि कई छात्र बीच में ही हार मान लेते हैं। बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
3. तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएँ
ऑनलाइन पोर्टल की दिक्कतें, आवेदन लंबित रहना, सत्यापन में देरी और बैंकिंग प्रक्रिया की जटिलता युवाओं के उत्साह को कम करती है।
4. रोजगार से सीधा संबंध नहीं
युवाओं का मानना है कि केवल ऋण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा पूरी होने के बाद रोजगार या करियर मार्गदर्शन की मजबूत व्यवस्था भी आवश्यक है।
क्या “परामर्श” केवल नाम भर रह गया?
जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र का नाम ही बताता है कि यहाँ “परामर्श” सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में होना चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई केंद्रों में केवल आवेदन जमा करने और दस्तावेज जांचने का कार्य प्रमुख रह गया है।
युवाओं को करियर काउंसलिंग, मानसिक मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार अवसरों पर नियमित सत्र शायद ही कहीं देखने को मिलते हैं।
यदि किसी योजना में “युवा” और “परामर्श” दोनों ही गायब हो जाएँ, तो फिर उस योजना की आत्मा ही समाप्त हो जाती है।
सरकार की मंशा पर नहीं, व्यवस्था पर सवाल
यह कहना गलत होगा कि योजना की अवधारणा खराब थी। वास्तव में “आर्थिक हल, युवाओं को बल” एक दूरदर्शी सोच थी। इस योजना ने अनेक गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर दिया। हजारों छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में पढ़ाई कर रहे हैं।
समस्या योजना की मंशा में नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन और निगरानी में दिखाई देती है। जब किसी योजना की निरंतर समीक्षा नहीं होती, कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं होती और युवाओं की वास्तविक जरूरतों को नहीं समझा जाता, तब योजनाएँ धीरे-धीरे निष्प्रभावी हो जाती हैं।
अब क्या किया जाना चाहिए?
यदि सरकार वास्तव में इस योजना को पुनर्जीवित करना चाहती है, तो कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे-
- प्रत्येक DRCC केंद्र में प्रशिक्षित करियर काउंसलर नियुक्त किए जाएँ।
- युवाओं के लिए नियमित रोजगार एवं कौशल मार्गदर्शन शिविर आयोजित हों।
- स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाई जाए।
- लंबित आवेदनों की समयबद्ध समीक्षा हो।
- कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से DRCC का सीधा समन्वय स्थापित किया जाए।
- डिजिटल पोर्टल को अधिक प्रभावी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया जाए।
- हर जिले में युवाओं से फीडबैक लेकर व्यवस्था में सुधार किया जाए।
निष्कर्ष
बिहार युवा शक्ति का प्रदेश है। यहाँ की सबसे बड़ी पूंजी उसके युवा हैं। यदि उन्हें सही दिशा, शिक्षा और अवसर मिले तो वे राज्य की तस्वीर बदल सकते हैं।
“आर्थिक हल, युवाओं को बल” केवल एक सरकारी नारा नहीं था, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों का आधार था। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और प्रशासन इस योजना की आत्मा को फिर से जीवित करें।जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र केवल भवन बनकर न रह जाएँ, बल्कि वे सचमुच युवाओं के भविष्य निर्माण के केंद्र बनें। क्योंकि जब युवा मजबूत होंगे, तभी बिहार मजबूत होगा।
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