राम के द्वारा मुक्ति
संजय जैनमंदिर मस्ज़िदों में भेद हम।
क्यों और किस लिए कर रहे।
ईश्वर को भी हम और आप ।
क्यों नही अपने पे छोड़ रहे।।
राम अवतार लेकर आये थे
कुछ करने के उद्देश्य से।
पृथ्वी पर जो हो रहा था
लोगों के साथ अत्याचार।।
इसलिए राम ने चुना था।
चौहदा साल का वनवास।
कैंकई तो बस जरिया थी।
जबकि राम को जाना था वनवास।।
वन में जाकर राम ने ही
ऐसी लीलाये रची थी की।
राक्षस स्वयं ही फस गये
उनके इस माया जाल में।।
राक्षसों को भी मालूम था
की अगर मुक्ति हमें पाना है।
तो क्यों न हम राम को चुने
और माँ सीता का हरण करे।।
जिसे कारण ही कुल की
मुक्ति का मार्ग बने राम।
और पृथ्वी से राक्षस जाति का
पूरी तरह से हो गया अंत।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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