नेपाल के राजमहल नारायणहिटी में भव्य हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी संपन्न


- सनातन संस्कृति, हिंदू राष्ट्र और भारत-नेपाल संबंधों पर हुई गंभीर चर्चा
नारायण हेती काठमांडू में स्थित नेपाल सरकार की पंचांग निर्णायक विकास समिति के सभागार में एक भव्य हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में नेपाल और भारत के अनेक विद्वानों, प्राध्यापकों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों तथा सनातन धर्म के अनुयायियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सनातन वैदिक संस्कृति की रक्षा, भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती तथा हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर व्यापक विमर्श करना था।
यह संगोष्ठी पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी के कृपापात्र शिष्य एवं “विश्व ब्राह्मण भूषण” से सम्मानित अधिवक्ता प्रेमचंद झा के सानिध्य में आयोजित की गई। कार्यक्रम का सफल संयोजन नेपाल सरकार नेपाल पंचांग निर्णायक समिति के कार्यकारी निदेशक आचार्य लक्ष्मण पंथी द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में नेपाल के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं बुद्धिजीवियों की विशेष उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से प्रोफेसर प्रोफेसर डॉक्टर देवमणि भट्टराई ,डॉक्टर पुरुषोत्तम भट्टराई, खिलहरी धीमिरे, प्रभात पोखेल, नेपाल सरकार के पूर्व एवं वर्तमान सहसचिव, उपसचिव, अधिकृत लगायत, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, डॉक्टर, इंजीनियर , खिलहरी धीमिरे, प्रभात पोखेल सहित नेपाल सरकार के पूर्व एवं वर्तमान सहसचिव, उपसचिव, अधिकृत अधिकारी, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, चिकित्सक, इंजीनियर तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े विद्वान गण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन मठ पुरी द्वारा “भव्य नेपाल” के माध्यम से सनातन संस्कृति एवं हिंदू अस्मिता को जागृत करने का जो अभियान चलाया जा रहा है, वह केवल नेपाल ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के हिंदुओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने अपने संबोधन में भारत और नेपाल के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल केवल भारत का पड़ोसी राष्ट्र नहीं, बल्कि दोनों देशों का संबंध “रोटी और बेटी” का संबंध है। दोनों देशों की संस्कृति, परंपरा, धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक चेतना एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी महाराज सदैव यह कहते हैं कि भगवान जगन्नाथ और भगवान पशुपतिनाथ का संबंध केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकात्मता का प्रतीक है।
प्रेमचंद्र झा ने कहा कि यदि नेपाल सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से सशक्त रहेगा तो भारत भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत के नीति-निर्माताओं और शासकों का यह दायित्व बनता है कि वे नेपाल की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने में सहयोग करें।
अपने उद्बोधन में उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार का मूल धर्म सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म है। समय के साथ अनेक मत-पंथ और राष्ट्र अस्तित्व में आए, आज विश्व में दर्जनों इस्लामिक एवं ईसाई राष्ट्र हैं, लेकिन हिंदुओं का कोई आधिकारिक राष्ट्र नहीं है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वभर के हिंदू संगठित होकर भारत और नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के लिए संगठित प्रयास करें।
संगोष्ठी के दौरान उपस्थित विद्वानों एवं समाजसेवियों ने सनातन संस्कृति की रक्षा एवं हिंदू समाज के संगठन की आवश्यकता पर बल दिया। अनेक वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसके लिए भारत और नेपाल को मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने पूज्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी के अभियान को समर्थन देते हुए तन, मन और धन से सहयोग करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री दर्शन पनेरु, रमेश केसी, शेखर सपोटा, प्रत्यूष काफिले, सूदन बहादुर श्रेष्ठ सहित अनेक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं विद्वानों का अभिनंदन किया गया तथा सनातन धर्म, सांस्कृतिक एकता और विश्व कल्याण के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।
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