“जहाँ सादगी मुस्कुराती है, वहीं असली खूबसूरती जन्म लेती है… ”
तेरी सादगी में बसता है, खूबसूरती का अंदाज़
कुमार महेंद्र
ज्यों चाँदनी की ओट से,
झरता प्रणय-विहान।
बिन आभूषण भी दमक उठे,
मृदुल सरल मुस्कान।
काजल-सी गहरी आँखों में,
स्नेहिल सपनों का आगाज़।
तेरी सादगी में बसता है, खूबसूरती का अंदाज़।।
बिन लाली अधरों पर फिर भी,
मधुमय लगे हँसी।
प्रथम किरण-सी निर्मल छवि,
मन में घोले खुशी।
काँटों में खिलता पुष्प जैसे,
बिखराए सुख का साज़।
तेरी सादगी में बसता है, खूबसूरती का अंदाज़।।
वो सरिता जो मौन बहती,
बिन कलरव, बिन शोर।
जिसकी शीतल धार सदा,
भर दे जीवन भोर।
जो सजती नहीं फिर भी देती,
सौंदर्य को नव आवाज़।
तेरी सादगी में बसता है, खूबसूरती का अंदाज़।।
सादगी ही शाश्वत शोभा,
जीवन का श्रृंगार।
जिसके सम्मुख फीके पड़ते,
वैभव के विस्तार।
इसके पावन सान्निध्य में,
हर भाव बने नव ताज।
तेरी सादगी में बसता है, खूबसूरती का अंदाज़।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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