"काल का मौन आलोक"
पंकज शर्मा
काल कभी हमारे साथ चलने वाला सहचर नहीं होता; वह तो जीवन-पथ का निःशब्द साधक एव मार्गदर्शक है, जो अनुभवों की अग्नि में तपाकर मनुष्य को परिपक्व बनाता है। व्यक्ति, संबंध एवं परिस्थितियाँ समय के प्रवाह में आते-जाते रहते हैं, परंतु काल की यह सूक्ष्म साधना हमारे अंतःकरण में धैर्य, विवेक एवं साहस का ऐसा बीज रोपित कर देती है, जो विपत्तियों में भी अडिग रहने की शक्ति देता है। इसी अंतर्निहित बल के सहारे मनुष्य अपने पथ को पुनः आलोकित करता है।
जब बाह्य सहारे छूट जाते हैं एवं मार्ग एकाकी प्रतीत होता है, तब यही काल-प्रदत्त साहस हमारी वास्तविक संगति बन जाता है। यह हमें सिखाता है कि स्थायित्व बाह्य संबंधों में नहीं, अपितु आत्मबल में निहित है। अतः जो समय के संकेतों को समझ लेता है, वह जीवन के प्रत्येक परिवर्तन में अवसर का प्रकाश देख पाता है।
काल न चलता संग में, देता मर्म सिखाय।
छूटें सब संगी-सजन, हिय बल साथ निभाय॥
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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