Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

जिनगी के कहानी ।

जिनगी के कहानी ।

का कहीं जिनगी के कहानी ,
हमरा देह अब लसारत बा ।
धोबी के पाट धोबी अईसन ,
ध के हमरा खॅंचकारत बा ।।
जीयब चाहे नाहिए त मरब ।
मर के जाईब हम कब ऊपर ,
या जिनगीए में हम सड़ब ।।
एक बेर बचलीं कोरोना से ,
दोसरे पीलिया बहल धारा ।
एही में गोल ब्लेडर पथरी ,
दिने में गिनीं नभ के तारा ।।
तीसरे अब दिल के बेमारी ,
ना केहूओ से प्यार भ‌ईल ।
बुढ़ापा में मनवो बुढ़ाईल ,
दिल दौरा बारंबार भ‌ईल ।।
मनवा ईमानवा का भूलाई ,
जब प्रीत हो गईल रीत से ।
कभी खुशी कभी गम के ,
शेयर करिले हर मीत से ।।
शनीचर से भ‌ईलीं पीड़ित ,
फलेरिया जाड़ बोखार से ।
का कहीं आपन ई हालत ,
पीड़ित प्राकृतिक मार से ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ