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पटना में वैदिक वैभव का संगम: पंडित अवधेश झा को मिला दोहरा राष्ट्रीय सम्मान

पटना में वैदिक वैभव का संगम: पंडित अवधेश झा को मिला दोहरा राष्ट्रीय सम्मान

पटना, 7 अप्रैल 2026 - बिहार की ऐतिहासिक राजधानी पटना एक बार फिर आध्यात्मिक और वैदिक ऊर्जा से सराबोर दिखी, जब यहां आयोजित “इंटरनेशनल एस्ट्रो, वास्तु एवं तंत्र सम्मेलन–2026” में देश-विदेश के विद्वानों का भव्य समागम हुआ। इस गरिमामयी अवसर पर ज्योतिर्विद पंडित अवधेश झा को ज्योतिष एवं वैदिक विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘आर्यभट्ट सम्मान’ एवं ‘पटन देवी सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
पटना में आयोजित तीन दिवसीय “इंटरनेशनल एस्ट्रो, वास्तु एवं तंत्र सम्मेलन–2026” के दौरान ज्योतिर्विद पंडित अवधेश झा को ज्योतिष एवं वैदिक विद्याओं में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘आर्यभट्ट सम्मान’ एवं ‘पटन देवी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान विश्व ज्योतिष महासंघ के अध्यक्ष डॉ. लोकराज पौडेल, कॉन्फ्रेंस कन्वेनर आचार्य डॉ. अशोक कुमार मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता राम प्रवेश 'पूरी' तथा बिहार के पूर्व महाधिवक्ता ललित किशोर सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान पंडित अवधेश झा ने “ज्योतिष: ब्रह्म के कालखंड का विज्ञान” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ज्योतिष केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि समय और ब्रह्मांड की वैज्ञानिक व्याख्या का माध्यम है।
उल्लेखनीय है कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विश्व ज्योतिष महासंघ, दक्षिण एशियाई ज्योतिष महासंघ एवं एस्ट्रो, वास्तु एंड वैदिक साइंसेज हब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें भारत और नेपाल सहित विभिन्न देशों के ज्योतिषाचार्य, वास्तु विशेषज्ञ, तांत्रिक विद्वान एवं शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
तीन दिवसीय इस आयोजन के दौरान ज्योतिष एवं तंत्र विषयों पर गहन विमर्श, शोध-पत्र प्रस्तुतियाँ और वैदिक विद्याओं की आधुनिक प्रासंगिकता पर चर्चा की गई। साथ ही ‘पटना अधिवेशन घोषणा-पत्र’ भी जारी किया गया।
सम्मेलन के अंतिम दिन प्रतिभागियों को शहर के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कराया गया।
पंडित अवधेश झा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन वैदिक विद्याओं के प्रसार, शोध को बढ़ावा देने तथा भारत-नेपाल सहित अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह सम्मान पंडित अवधेश झा के साथ-साथ मिथिला एवं बिहार की समृद्ध वैदिक परंपरा के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।
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