हनुमान त्याग, सेवा और निष्छल प्रेम के जीवंत देव हैं:- डॉ. विवेकानंद मिश्र
गया, 2 अप्रैल 2026 (दिव्य रश्मि न्यूज):
पुण्यसलिला फल्गु नदी के पावन तट पर स्थित मोक्षदायिनी नगरी गया जी में श्री हनुमान जन्मोत्सव के शुभ एवं मंगलमय अवसर पर एक भव्य, गरिमामय एवं आध्यात्मिक सभा का आयोजन किया गया। यह दिव्य समागम डॉ. विवेकानंद पथ स्थित परिसर में भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विद्वान, समाजसेवी एवं श्रद्धालु उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का वातावरण वेद मंत्रों की पवित्र ध्वनि और “जय श्री राम” के गगनभेदी उद्घोष से भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर उपस्थित विद्वज्जनों ने पवनपुत्र हनुमान जी के जीवन, चरित्र और आदर्शों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज को प्रेरित किया।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने अतिथियों का पारंपरिक एवं आत्मीय स्वागत करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि हनुमान जी त्याग, सेवा और निष्छल प्रेम के जीवंत स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि महावीर हनुमान का चरित्र केवल शक्ति और पराक्रम का प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और विनम्रता का अद्वितीय संगम है। उनका जीवन निराश और हताश मनुष्यों के लिए संजीवनी के समान है, जो उन्हें नई ऊर्जा और आशा प्रदान करता है।
महासभा के संरक्षक शिवचरण बाबू डालमिया ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में समाज, विशेषकर विप्र समाज को हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा भावना और समर्पण को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है।
समाजसेवी मृदुला मिश्रा ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार से मुक्त होकर समाज सेवा में जुटता है, तभी राष्ट्र और धर्म का वास्तविक उत्थान संभव होता है। उनके प्रेरणादायक विचारों ने उपस्थित जनसमूह में कर्तव्य और धर्म के प्रति नई चेतना का संचार किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने अपने ओजस्वी और शास्त्रसम्मत वक्तव्य में रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि हनुमान जी की अजेय शक्ति उनकी अनन्य रामभक्ति में निहित है। उन्होंने बताया कि “विद्या ददाति विनयम्” का सिद्धांत हनुमान जी के चरित्र में पूर्ण रूप से परिलक्षित होता है, क्योंकि अपार शक्ति और ज्ञान के बावजूद वे सदैव विनम्र सेवक बने रहे।
कार्यक्रम के अंत में सुनील कुमार पाठक ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यदि मनुष्य अपने हृदय में राम और हाथों में सत्कर्म को धारण करे, तो उसका जीवन स्वतः सार्थक हो जाता है।
सभा का समापन सामूहिक रूप से श्री हनुमान चालीसा के पाठ और महाआरती के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ज्ञान, भक्ति और सामाजिक समरसता का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिसकी दिव्य स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के मन में अंकित रहेंगी।इस अवसर पर डॉ. ज्ञानेश्वर भारद्वाज, डॉ. रविंद्र कुमार, डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, महेश मिश्रा, विश्वजीत चक्रवर्ती, शंभू गिरी, दिलीप कुमार, नीरज वर्मा, रूबी कुमारी, धर्मेंद्र कुमार, शिवाजी सिंह, रणजीत मिश्रा, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, अमरनाथ पांडे, आचार्य राजाबाबू, बबलू गोस्वामी, रंजना पांडे, शीला त्रिपाठी, पुष्प लता, शीतल चौबे, दीपक पाठक, मनीष कुमार, रंजीत राज, डिंपल कुमारी, अनुपम मिश्रा, मेघा मिश्रा, अजय कुमार मिश्रा, सुनील कुमार, अभय कुमार, सूबेदार सिंह, नौरंगी दास, गुप्तेश्वर ठाकुर, फूल कुमारी, नीलम कुमारी, पार्वती देवी, मालती देवी, बेबी देवी, किरण कंचन पाठक एवं विक्रम मिश्रा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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