गुरु शिष्य
संजय जैनगुरु शिष्य को गुरु शिष्य को
ज्ञान रोज देते थे कक्षा में।
पर प्रश्न नही करते थे कभी
अपने शिष्यों से।।
गुरु शिष्य को......।।
जो गुरु ने वर्षो शिष्यों को
दिया था ज्ञान हर दिन।
आज शिष्य की बारी आई
तो गुरु ने भेजा शिष्य को।
अब शिष्यों को सिध्द करना
की तेरे गुरु विद्वमान् है क्या।
सब की निगाहें अब शिष्यों पर
केंद्रीयत हो गई है।।
गुरु शिष्य को गुरु शिष्य को
ज्ञान रोज देते थे कक्षा में।।
श्रवको के सामने गुरु की
बहुत ही अच्छी छवि है।
लोग उनको कलयुग का
मानते है भगवन जो।
अब भगवन के शिष्यों की
आई गई कठिन परीक्षा।
अब शिष्यों को सिध्द करना
कि गुरु ही हमारे आदर्श है।।
गुरु शिष्य को गुरु शिष्य को
ज्ञान रोज देते थे कक्षा में।।
गुरु ने छोड़ दिये अब शिष्यों को
चारों दिशाओं में।
की जाकर धर्म ज्योत को
जलाओं चारों दिशाओं में।
और धर्म का करो तुम सब
प्रचार प्रसार संसार में।
और साथ ही धर्म की
ज्योति जलाते रहो बस।।
गुरु शिष्य को गुरु शिष्य को
ज्ञान रोज देते थे कक्षा में।
पर प्रश्न नही करते थे कभी
अपने शिष्यों से।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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