पंडित अनंतदेव मिश्र: एक पारसधर्मी व्यक्तित्व:-आचार्य सच्चिदानंद मिश्र

गया, 27 अप्रैल 2026
गया में एक गरिमामयी संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राजनेता और युगदृष्टा पंडित अनंतदेव मिश्र की 14वीं पुण्यतिथि मनाई गई। यह कार्यक्रम स्थानीय समाजसेवी डॉ. विवेकानंद मिश्र के आवास पर आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जगत के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
संगोष्ठी की शुरुआत समाजसेवी एवं व्यवसायी चरण बाबू डालमिया ने की। उन्होंने कहा कि पंडित अनंतदेव मिश्र केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे भारतीय राजनीति के तपोवन में एक सिद्ध तपस्वी और वटवृक्ष के समान थे, जिनकी छाया में अनेक पीढ़ियाँ विकसित हुईं। उनके विचारों और कर्मों ने समाज को नई दिशा दिखाई।

गया जिला कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ नेता गजाधर लाल पाठक ने कहा कि अविभाजित गया जिला के कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पंडित अनंतदेव मिश्र का कार्यकाल शुचिता, कर्मठता और कर्तव्यनिष्ठा का स्वर्णिम उदाहरण रहा। उनकी दूरदृष्टि और मेधा के कारण उन्हें न केवल बिहार, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष सम्मान मिला।
वरिष्ठ भाजपा नेता हरिनारायण त्रिपाठी और भारतीय जन क्रांति दल के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आर.डी. मिश्रा ने कहा कि पंडित अनंतदेव मिश्र अनेक नेताओं के राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक रहे। बिहार विधानसभा के सभापति डॉ. प्रेम कुमार उन्हें अपना अभिभावक और प्रेरणास्रोत मानते रहे हैं। उनके सानिध्य में रहकर अनेक नेताओं ने जनसेवा, संगठन और राजनीति के मूलभूत आदर्शों को सीखा।
बिहार विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि पंडित अनंतदेव मिश्र का संपूर्ण जीवन वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए एक अनुकरणीय आदर्श है। उन्होंने निष्ठा, ईमानदारी और जनसेवा के उच्च मानकों को स्थापित किया, किंतु कुटिल राजनीति के कारण उन्हें वह सम्मानजनक स्थान नहीं मिल सका, जिसके वे अधिकारी थे। इसके बावजूद उनके समर्पण में कभी कमी नहीं आई।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रो. राम जतन सिंह ने कहा कि पंडित अनंतदेव मिश्र का तेजस्वी व्यक्तित्व और सादगीपूर्ण जीवन शैली उन्हें एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती थी। वे हमेशा संगठन और विचारधारा के प्रति समर्पित रहे।
साहित्यकार राधा मोहन मिश्र ‘माधव’, आचार्य सच्चिदानंद मिश्र और अन्य विद्वानों ने कहा कि पंडित अनंतदेव मिश्र का जीवन एक महायज्ञ के समान था, जिसमें उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं का त्याग कर केवल राष्ट्र और समाज के कल्याण को ही अपना उद्देश्य बनाया। आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने कहा कि उनका व्यक्तित्व पारसधर्मी था-जो भी उनके संपर्क में आया, वह श्रेष्ठता की ओर अग्रसर हुआ।
वामपंथी विचारधारा के वरिष्ठ नेता अधिवक्ता याहिया सुमन गिरी अजय मिश्रा आचार्य अरुण कुमार मधुप आचार्य सुनील कुमार पाठक राजीव नयन पांडेय डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज रणजीत पाठक अमरनाथ पांडे पवन मिश्रा शारदा साहिबा किरण पाठक वीणा कुमारी देवानंद देवर्षी टिंकू कुमार नीलम कुमारी नम्रता ओझा गोविंद बाबू गुपुत प्रेमनाथ टईया राजीव लाल गुर्दा लालू झांगर रमेश जी गायब चंदन धोकड़ी शिवम गौड डॉक्टर जितेंद्र कुमार मिश्र रूबी कुमारी देवेंद्रनाथ मिश्र डॉक्टर दिनेश कुमार डॉक्टर रविंद्र कुमार प्रोफेसर अशोक कुमार मनीष कुमार डॉक्टर शंभू कुमार अरुण ओझा मृदुला मिश्रा शंभू गिरी नीरज वर्मा जितेंद्र कुमार मिश्र दिलीप कुमार दीपक पाठक सुरेश राम गौतम कुमार रंजना पांडे कविता राऊत रोमी कुमारी विश्वजित चक्रवर्ती हरिद्वार मिश्रा फूल कुमारी प्यारी देवी चांदनी कुमारी की उपस्थिति रही |
अंत में उपस्थित सभी लोगों ने पंडित अनंतदेव मिश्र की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए उनके आदर्शों-सत्यनिष्ठा, सेवा और समर्पण-पर चलने का संकल्प लिया। यह संगोष्ठी न केवल श्रद्धांजलि का अवसर बनी, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाला प्रेरणास्रोत भी सिद्ध हुई।
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