भित्ति चित्र-इतिहास के जीवंत चरित्र
कुमार महेंद्र
प्रस्तर अंतर में वास्तु यौवन,
इतिहास अलंकृत कामनाएँ।
पुरातन जीवन के आरेखों में,
चितवन रचतीं स्तुत भावनाएँ।
विगत दिनचर्या का यथार्थ-दर्शन,
निहार-विहार, जन-हृदय पवित्र।
भित्ति चित्र—इतिहास के जीवंत चरित्र।।
हर भित्ति लोक-रंग की पर्याय,
संरक्षण-प्रणय हेतु तत्पर।
आभामंडल में संस्कृति की मुस्कान,
अथाह आस्था, विश्वास परस्पर।
चाहे पुनः प्राण-प्रतिष्ठा पाए स्थापत्य,
अराइश अठखेलियाँ सचित्र।
भित्ति चित्र—इतिहास के जीवंत चरित्र।।
उत्संग बयार आनंदिका,
ऐतिहासिक दृश्य मनभावन।
परंपरा-संस्कार, मृदुल ज्ञान,
हिय सृजन-कौशल सुहावन।
खुली कला दीर्घा,अमूल्य धरोहर,
हस्तशिल्प अलौकिक विचित्र।
भित्ति चित्र—इतिहास के जीवंत चरित्र।।
नवलगढ़, मंडावा, बिसाऊ सहित,
महनसर, फतेहपुर—हवेलियाँ मनहर।
शिल्प-सौष्ठव, मनोरमा अद्भुत,
रज-रज कलात्मक आभा निर्झर।
कामना उज्ज्वल, ओजस्वी भविष्य,
राज करे संरक्षण, बने सच्चा सहचर मित्र।
भित्ति चित्र—इतिहास के जीवंत चरित्र।।
✍️ कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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