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एक कड़वा सत्य

एक कड़वा सत्य

काम-धाम को लेकर
बातें होती रहती है।
जग हाँसाई से अच्छा है
घर हाँसाई ही हो जाये।
कर्तव्य पथ पर चलना
क्या काँटों से कम है।
दाग दगा जहाँ देना
लोगों की आदत है।।

जीवन जीने के रास्ते
बहुत टेढ़े मेढ़े है।
प्रेम भाव का जिसमें
अभाव भी दिखता है।
संघर्ष भरा ये जीवन
हमें अच्छा लगता है।
फिर से मानव जीवन
पाना तो मुश्किल है।।

आज दुखी होकर के
कल को कोसतें है।
पर अपने कर्मों की
बात नही करते है।
बोया पेड़ बाबुल का
तो आम कहाँ से होए।
जो ये बात समझे
वो ही सुखी होए।।

जीवन की सच्चाई का
तुम्हें पता लगाना है।
मायावी इस दुनिया का
सत्य भी जानना है।
देखा देखी जहाँ पर
आदत जो बन गई है।
इस आदत से तुम्हें
अब छुटकारा पाना है।।
और मानव जीवन को
जी-कर सार्थक करना है।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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