एक कड़वा सत्य
काम-धाम को लेकरबातें होती रहती है।
जग हाँसाई से अच्छा है
घर हाँसाई ही हो जाये।
कर्तव्य पथ पर चलना
क्या काँटों से कम है।
दाग दगा जहाँ देना
लोगों की आदत है।।
जीवन जीने के रास्ते
बहुत टेढ़े मेढ़े है।
प्रेम भाव का जिसमें
अभाव भी दिखता है।
संघर्ष भरा ये जीवन
हमें अच्छा लगता है।
फिर से मानव जीवन
पाना तो मुश्किल है।।
आज दुखी होकर के
कल को कोसतें है।
पर अपने कर्मों की
बात नही करते है।
बोया पेड़ बाबुल का
तो आम कहाँ से होए।
जो ये बात समझे
वो ही सुखी होए।।
जीवन की सच्चाई का
तुम्हें पता लगाना है।
मायावी इस दुनिया का
सत्य भी जानना है।
देखा देखी जहाँ पर
आदत जो बन गई है।
इस आदत से तुम्हें
अब छुटकारा पाना है।।
और मानव जीवन को
जी-कर सार्थक करना है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews