मोहब्बत की बात

मोहब्बत की बात

डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"

हर इक लता में छुपी इक मोहब्बत की बात है,
दो बदन हैं, मगर प्रेम ईश्वर की सौगात है।

मिट्टी की गोद में ये हरियाली की शुरुआत है,
तू जो पास है मेरे, हर मौसम अब बरसात है।

टहनी-टहनी में धड़कती इक नई-सी हयात है,
हाथ तेरा थाम लूँ तो हर मुसीबत को मात है।

फूल से लिपटी हुई ये सादगी की इक ज़ात है,
नर्म झुकी नज़रें मगर दिल में सजी बारात है।

कुदरत ने गढ़ दिया है जो प्रेम का जज़्बात है,
बिन कहे ही कह रही हर अदा की बात है।

“राकेश” इस मंज़र में बस इतना-सा एहसास है,
जो दिलों में बस गया, वही मुकम्मल साथ है॥

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