काले घोड़े की नाल और नाव की कील का प्रभाव

आनन्द हठीला
शनिदेव का नाम सुनकर लोगों को पसीना आ जाता है,लेकिन वास्तव में शनि देव बहुत ही दयालु, बहुत ही कृपालु है, यदि आप जीवन में सत्य न्याय के रास्ते पर चलते हैं तो, शनिदेव कभी आपसे नाराज नहीं होंगे, शनिदेव केवल दुष्टों और पापियों से नाराज होते हैं, उन्हें कठोर से कठोर दंड देते हैं ! सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलने वालों को शनिदेव समय समय पर उचित पुरस्कार देते हैं !
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को क्रूर ग्रह माना जाता है, इसकी स्थिति से किसी भी व्यक्ति का पूरा जीवन प्रभावित होता है। शनि को न्यायाधिश का पद प्राप्त है। यह हमें हमारे कर्मों का फल प्रदान करता है। जिस व्यक्ति के जैसे कर्म होते हैं उसी के अनुसार उन्हें फल की प्राप्ति होती है। शनि साढ़ेसाती और ढैय्या के समय सबसे अधिक प्रभावी होता है।
सामान्यत: साढ़ेसाती और ढैय्या के समय अधिकांश व्यक्तियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनसे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि शनि देव की आराधना और धार्मिक कर्म करें।
शनि कृपा प्राप्ति के लिए एक सटिक उपाय बताया गया है नाव की कील। नाव की कील का छल्ला बनवाकर इसे मिडिल फिंगर में शनिवार के दिन पहनें। यह एक सटीक उपाय है।
शनि देव का प्रकोप किसी पर पड़ जाए तो उसका जीवन कष्टों से भर जाता है। व्यक्ति के अच्छे–बुरे कर्मों का फल शनि देव ही देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप शनिदेव को प्रसन्न रखें और भक्ति भाव से उनकी पूजा करें। शनि देव का प्रकोप अत्यंत ही भयंकर परिणाम देता है।
नाव की कील की अंगूठी धारण करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। बिगड़े कार्य स्वत: ही बन जाते हैं। सभी परिणाम आपके पक्ष में आने लगते हैं।
लोहे की कील शनि की है । और जब यही कील नाव में लग जाती है तो कुछ और बन जाती है ।
चंद्र के पानी पर यह नाव तैरती है। मंगल के कटाव बहाव को चीरती आगे बढ़ती है ।
शुक्र के त्रिकोण होते है नाव और कील में ।
और राहु ।
राहु का ही तो है यह सारा समन्दर और जलीय जीव ।
यह समुद्री नांव की कील कीअंगूठी ( ring ) निलम की तरह बेहद असर कारक है ।
पर इसको निर्माण और धारण करने के कुछ विशेष विधि है । और जब यह सही ढंग से तैयार हो जाती है तो शुरुआत हो जाती है अप्रत्याशित सफलताएं और आश्चर्य जनक रूप से हर मुसीबत , किसी भी परेशानी और क्लेश से छुटकारा ।
शनिदेव को प्रसन्न करने का महाउपाय
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इस समुद्री नाव की कील की अंगूठी शनिवार या शनि जयंती अथवा शनि अमावस्या के विशेष ऊर्जा काल के दिन बिना अग्नि मे तपाये बनाई जाती है।
इसे तिल्ली के तेल में 7 दिन शनिवार से शनिवार तक रखा जाता है तथा उस पर शनि मंत्र के 23,000 जाप से सिद्ध तथा प्राण प्रतिष्ठित करके भेजा जाता है।
शनिवार के दिन शाम के समय इसे धारण करें। यह अंगूठी मध्यमा (शनि की अंगुली) में ही पहनें तथा इसके लिए पुष्य, अनुराधा, उत्तरा, भाद्रपद एवं रोहिणी नक्षत्र सर्वश्रेष्ठ हैं।
धारण करने के बाद रुद्राक्ष की माला से नीचे लिखे किसी एक मंत्र की कम से कम 5 माला जप करें तथा शनिदेव से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें। यदि प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जप करेंगे तो शीघ्र लाभ होगा।
मंत्र -
पौराणिक शनि मंत्र:
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ॐ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्। ।
क्योंकि यह राहु और शनि की कुछ विशेष प्रिय वस्तुओ में से है ।
यदि आपकी कुंडली मे राह अथवा केतु नीच राशि मे है, अशुभ स्थिति मे है तो राह केतु की दशा अंतर दशा मे आपको नांव के कील की अंगूठी अवश्य धारण करना चाहिए!〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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